कोरोना काल में बदला कारोबार का ट्रेंड

कोरोना संकट के खिलाफ जंग में हम चुनौती को स्वीकार कर खुद लड़ना सीख रहे हैं। इसमें सामाजिक बदलाव के साथ साथ कोरबार का ट्रेंड भी बदलने लगा है। तभी तो जो लोग लॉकडाउन के वक्त अपनी दुकाने बंद करके परेशान थे वो आज इसी लॉकडाउन के दौरान अपने कारोबार को चमका रहे हैं। जिससे इन लोगों की आय में बढ़ोत्तरी हुई है तो लोगों को ये रोजगार भी देने के लायक बने हैं।

बाजारों में कोरोना से बचाने वाले सामानों की दुकानों की भरमार

लॉकडाउन के दौरान देश में कुछ ही जरूरी दुकाने थी जिन्हें छूट दी गई थी बाकी दुकानों में ज्यादातर ताले ही लटके हुए दिखाई दे रहे थे। लेकिन इस बीच अब देश में कारोबार का एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जिसके तहत आपको अपने इलाकों की बाजारों में नई तरह की दुकाने देखने को मिल जाएगी।  जिसमें सैनिटाइजर की सबसे ज्यादा दिख रही होगी, जिससे ये पता चलता है कि आज देश में सैनिटाइजर बनाने वाले कारखानो की संख्या में इजाफा हुआ इसी तरह डिस्पेंसर विथ सेंसर मशीन जैसे उपकरण भी आज भारत की बाजारों में खूब देखे जा रहे हैं। इस मशीन से नीचे हाथ रखते ही पूरी हथेली सैनिटाइज हो जाती है।  हथेली हटते ही मसीन बंद हो जाती है। आज इस मशीन की खूब डिमांड देखी जा रही है। इसी तरह पीपीई किट भी देश के भीतर खूब बनाये जा रहे हैं जिसका असर ये हुआ है कि आज भारत पीपीई किट बनाने वाले देशो में दूसरे नबंर पर पहुंच गया है। इतना ही नहीं मास्क का उत्पादन देश के भीतर इतनी तेजी से हुआ कि आज 500 रूपये में मिलने वाले मास्क 50 से 70 रूपये में उपलब्ध हो गये हैं। यानी भारत के कारोबारी ये समझ चुके हैं कि आज की तारीख में इस तरह के उत्पादन बनाने में ज्यादा कमाई है इसलिये आज छोटे से छोटा या बड़े से बड़े कारोबारी इस नई ट्रेंड की ओर ज्यादा चलने की तैयारी में जुट गये हैं।

देश के भीतर भारी डिमांड

बिजनेस वर्ल्ड में डिमांड सप्लाई  ये दो शब्द बहुत खास है जिसका मतलब ये होता कि जिस सामान की जरूरत ज्यादा होती है उसका उत्पादन भी ज्यादा होने लगता है। जो आज देखा जा रहा है। कई बड़े कारोबारी हो या छोटे इस क्रम में आज कोरोना से बचाने वाली वस्तुओं का करोबार करने लगे हैं। क्योंकि आज बड़े बड़े आपार्टमेंट हो या फिर कंपनियां वो इन वस्तुओं की डिमांड कर रही है जिससे इस तरफ कोरोबार ज्यादा बढ़ा है। इतना ही नही इसी कदम का असर है कि कई दिन से बंद पड़ी कई फैक्टरियों में आज  रोजगार के नये साधन लोगों को मिल रहे हैं।

मतलब साफ है कि जिन वस्तुओं का उत्पादन हम न के बराबर करते थे आज उसका उत्पादन इतना कर रहे हैं कि देश  विश्व में इन सब वस्तुओं के उत्पादन में नबंर दो पर पहुच गया है। जिसके बाद यही लगता है कि जल्द ही हम पीपीई किट हो या मास्क या दूसरे सामान इतनी तादाद में बनाएंगे कि सभी देश पीछे हो जाएंगे। इसकी नींव भारत में अब पड़ भी चुकी है और इस नये ट्रेंड को भारत ने वक्त से पहले ही अपना भी लिया है। जो हमारे कल को बेहतर बनायेगा।