स्लीपर के किराये पर करें एसी कोच में सफर 

चुनिंदा रूटों पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे या इससे ज्यादा रफ्तार वाली ट्रेनों में आने वाले दिनो में सिर्फ एसी कोच होंगे। अपने नेटवर्क को अपग्रेड करने की योजना के तहत रेलवे यह तैयारी कर रहा है। लेकिन इसके साथ साथ एक अच्छी खबर ये है कि इन ट्रेनो का किराया ज्यादा नही होगा।

वातानुकूलित डिब्बों का होना तकनीकी जरूरत

देश में अभी चलने वाली ज्यादातर रेल की रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटे या इससे कम है। राजधानी, शताब्दी और दूरंतो जैसी प्रीमियर ट्रेनों को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की इजाजत है। इन ट्रेनों के डिब्बे 130 किलोमीटर प्रति घंटे या इससे ज्यादा रफ्तार पर चलने के लिए ठीक मानी जा रही है। लेकिन इसके लिए एसी कोच तकनीकी तौर पर जरूरी है इस लिये इन ट्रेनो में पूरी तरह से एसी कोच लगाने की बात हो रही है।

किराया नही होगा अधिक

इससे साथ साथ रेलवे ने ये भी साफ किया कि जिन मेल ट्रोनों को 130 किलोमीटर की रफ्तार से चलाने का प्लान बन रहा है उसमे एसी कोच लगाने के बाद भी किराया स्लीपर क्लास के बराबर का ही रखा जायेगा। जिससे देश के यात्रियों को परेशानी न हो बस रेलवे ऐसी ट्रेनो में 72 सीट वाले डिब्बों की जगह 82 सीट वाले डिब्बे लगायेगी जिससे रेलवे को घाटा कम उठाना पड़े। गौरतलब है कि रेलवे लगातार कोरोना काल के बाद अपने आप को बदलने में लगा है। जिससे वो मुसाफिरों को अधिक सुविधा दे सके, इसी क्रम में ये फैसला लिया गया है। रेलवे की माने तो 130 से 160 किलोमीटर की रफ्तार से चलाने के लिये पटरियों की तैयारी कोरोना काल के वक्त में पूरी कर ली गई है। हर तरह के मंडल में नई तकनीक लगाकर ट्रेन की स्पीड बढ़ाने की कोशिश की गई है। इतना ही नही ट्रेन कम लेट हो इसका भी उपाय किया गया है। तो मालगाड़ी के लिये कुछ मडंलो में अलग से पटरी भी पिछाई गई है जिससे यात्री ट्रेनों के चलने में दिक्कत कम हो सके और वो सही वक्त पर पहुंच सके।

कोरोन काल में रेलवे ने जिस तरह से लोगो को सुविधा दी है वो सच में तारीफ के काबिल है लेकिन इसके साथ साथ रेलवे ने इस दौरान अपनी व्यवस्था को ठीक किया है वो भी बहुत तारीफ के काबिल है। जिस तरह से पटरी सुधारी गई साथ ही रेलवे फाटक को खत्म करके वहां छोटे छोटे पुल बनाये गये। ये सब बताता है कि आपदा को कैसे रेलवे ने अवसर में बदला है जिसका फायदा आने वाले वक्त  देश के नागरिकों को मिलने जा रहा है हाई स्पीड ट्रेन के तौर पर।

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