मिशन गगनयान के लिए रूस में भारतीयों की ट्रेनिंग शुरू

देश के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मानव मिशन ‘गगनयान’ के लिए वायुसेना के चार पायलटों की ट्रेनिंग शुरू हो गई है। रूस की राजधानी मॉस्को स्थित गैगरीन रिसर्च एंड टेस्ट कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर (GCTC) में इसरो के पहले मानव मिशन गगनयान के लिए चार भारतीय वायुसेना के पायलटों का प्रशिक्षण शुरू हो गया है। 2022 में पृथ्वी की कक्षा में यह अंतरिक्ष यान चक्कर लगाएगा। इसी मिशन के लिए भारतीय पायलटों को अंतरिक्ष यात्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इसरो के ह्यूमन स्पेसलाइट सेंटर और रूस के स्टेट स्पेस कॉर्पोरेशन रोस्कॉस्मोस की कंपनी ग्लावकॉस्मोस के बीच इसके लिए 27 जून 2019 को समझौता हुआ था। इस ट्रेनिंग सेंटर का नाम 12 अप्रैल 1961 को अंतरिक्ष जाने वाले पहले इंसान यूरी गागरिन के नाम पर रखा गया है। सोवियत वायुसेना के पायलट गागरिन ने वोस्टोक-1 कैप्सूल में बैठकर पृथ्वी की कक्षा का चक्कर लगाया था।

पायलटों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के एक अधिकारी ने बताया कि जिन चार पायलटों का चयन किया गया है, अभी उनका पद और नाम सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। भारतीय वायुसेना के इन पायलटों को एक हफ्ते तक माइक्रो-ग्रैविटी में रहने और बायो साइंस का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रूसी लांच सर्विस प्रोवाइडर ग्लावकॉसमास के अनुसार कुल 12 महीने सुनियोजित तरीके से ट्रेनिंग प्रोग्राम चलेगा।

इसरो से हुए करार के तहत प्रशिक्षण

ग्लावकॉसमास की वेबसाइट पर जारी बयान में बताया गया कि गैगरीन रिसर्च एंड टेस्ट कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर (GCTC) ने इसरो से हुए करार के तहत सोमवार को प्रशिक्षण कार्य शुरू कर दिया है। अधिकांश प्रशिक्षण को GCTC में ही अंजाम दिया जाएगा। ग्लावकॉसमास के अनुसार 12 महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को विभिन्न् मौसमों और भौगोलिक क्षेत्रों में असामान्य लैंडिंग होने के हालात में सुरक्षित आने का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

बता दे की भारतीय पायलटों को रूस में प्रशिक्षण देने के लिए ग्लावकोस्मोस और इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान केंद्र के बीच करार पर 27 जून 2019 को हस्ताक्षर किया गया था। ग्लावकोस्मोस रूस की सरकारी अंतरिक्ष एजेंसी रोसकॉस्मोस की अनुषंगी कंपनी है।

भारत में भी प्रशिक्षण

परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने पिछले महीने कहा था कि रूस में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को भारत में विशेष रूप से इसरो द्वारा निर्मित क्रू और मॉड्यूल सर्विस का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें उन्हें मॉड्यूल का संचालन और उसमें कार्य करना इत्यादि सिखाया जाएगा।

इसरो ने ह्यूमनॉइड व्योममित्रा का वीडियो जारी किया था

भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा 1984 में रूसी यान में बैठकर अंतरिक्ष गए थे। गगनयान मिशन के जरिए भारतीय एस्ट्रोनॉट्स भारतीय यान में बैठकर स्पेस में जाएंगे। गगनयान को जीएसएलवी मैक-3 रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसरो ने 23 जनवरी को गगनयान में भेजी जाने वाली ह्यूमनॉइड ‘व्योममित्रा’ का वीडियो जारी किया था।

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