मोदी सरकार को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सफलता, चीन के साथ कम हुआ व्यापार घाटा

चीन और भारत एशिया की दो प्रमुख आर्थिक शक्ति हैं और दोनों ही देशों के बीच एशिया की प्रमुख आर्थिक शक्ति बनने की होड़ है. चीन और भारत के बीच भी आपसी व्यापार होते हैं लेकिन चीन का पलड़ा भारी है क्योंकि चीन के साथ भारत का Trade Deficit बहुत अधिक है. हालांकि पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में भारत ने चीन के साथ व्यापार घाटे को कम करने में कामयाबी पाई है. सीएनबीसी-टीवी 18 की खबर के मुताबिक चीन से आयात कम होने की वजह से भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 70 हजार करोड़ रुपये घटकर अब 3.7 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है. भारत को यह सफलता अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वार के कारण भी मिली है.

चीन को निर्यात 31 फीसदी बढ़ा

32 मार्च 2019 को खत्म हुए वित्त वर्ष के जारी प्राविजिनल आंकड़ों के मुताबिक भारत से चीन का निर्यात 31 फीसदी बढ़कर 1.2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. इसके अलावा आयात 8 फीसदी घटकर 4.8 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया. भारत से चीन को ऑर्गेनिक केमिकल्स, प्लास्टिक रॉ मैटेरियल, कॉटन यार्न के निर्यात से भारत को व्यापार घाटे को कम करने में कामयाबी हासिल हुई है.

ट्रेड वार के कारण चीन से घटा Trade Deficit

अमेरिका और चीन के बीच पिछले साल से ट्रेड वार जारी है. इसे लेकर कॉमर्स मिनिस्ट्री ने एक रोडमैप तैयार किया और पाया कि भारत में बने 603 गुड्स की चीन में बड़ी मांग तैयार की जा सकती है. इसे लेकर मंत्रालय ने सभी औद्योगिक संगठनों से ऐसे वस्तुओं की सूची तैयार करने को कहा था जिसकी मांग चीन में हो. वाणिज्य मिनिस्टर सुरेश प्रभु ने चीन के साथ व्यापार घाटे को कम करने के लिए अपनी रणनीति पर ट्वीट कर जानकारी दी. हालांकि सिर्फ निर्यात के लिए ही जोर नहीं दिया जा रहा है. मंत्रालय की कोशिश है कि चीनी कंपनियां भारत में निवेश के लिए आकर्षित हों.

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