आज भारत मना रहा 70वां संविधान दिवस, जानिए इससे जुड़े कुछ अनजाने और खास पहलू

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India is celebrating 70th Constitution Day

संविधान भारत का सर्वोच्च विधान है। यह दुनिया का न सिर्फ सबसे लंबा हस्तलिखित दस्तावेज है, बल्कि इसके निर्माताओं ने कई देशों की उन अच्छाइयों को भी इसके भीतर समेटा, जिससे भारत एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में मजबूत बन सके।

26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने संविधान को मंजूरी दी थी। आज उस मंजूरी के 70 साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर आपको रूबरू करवाते हैं भारतीय संविधान के कुछ खास और अनजाने पहलुओं से…

लेखक ने नेहरू से कहा मेहनताना नहीं लूंगा, बस हर पन्ने पर मेरा नाम चाहिए

संविधान की मूल प्रति को अपने हाथों से उकेरा था, उस समय के प्रख्यात कैलिग्राफर (सुलेखक) प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने। कैलिग्राफी रायजादा को पारिवारिक विरासत में मिली थी। उनके दादा भी यही काम करते थे। रायजादा ने इटेलिक शैली में बेहद खूबसूरती से संविधान लिखा, जिसमें उन्होंने एक भी त्रुटि नहीं की। खास बात यह है कि रायजादा ने तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरु से साफ कह दिया कि वो संविधान लिखने के लिए एक भी पैसा नहीं लेंगे। बस हरके पन्ने पर उनका नाम और अंतिम पृष्ठ पर स्वयं के साथ उनके दादा का नाम लिखने की इजाजत दी जाए, जिसे नेहरू ने मान लिया। रायजादा को सुलेख के लिए सरकार ने संविधान भवन में अलग से कक्ष उपलब्ध कराया। रायजादा के सुलेख और संविधान के हरेक पन्ने को संवारने का काम शांतिनिकेतन के कलाकारों ने किया। इनमें नन्द लाल बोस और उनके शिष्य प्रमुख थे।

हीलियम गैस से भरे कांच के शोकेस में रखीं हैं मूल प्रतियां

संविधान को हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में लिखवाया गया। इनकी मूल प्रतियां संसद भवन के पुस्तकालय में हीलियम गैस से भरे कांच के शोकेस में रखी हुई हैं। इस शोकेश को राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला और अमेरिका के गेटी संरक्षण संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया था।

एक हजार साल की मियाद वाले कागज की शीट पर हुआ लेखन

संविधान की पांडुलिपि एक हजार साल तक बचे रहने वाले सूक्ष्मीजीवी रोधक चर्मपत्र की शीट पर लिखी गई। इसका आकार 45.7 सेमी × 58.4 सेमी है। पांडुलिपि में 234 पृष्ठ शामिल थे, जिसका वजन 13 किलो था।

पहले मसौदे में हुए थे 2000 संशोधन

संविधान सभा में बहस और चर्चा के लिए जो मसौदा रखा गया, उसमें करीब 2000 संशोधन किए गए थे।

26 नवंबर को तैयार हुआ था आखिरी मसौदा

संविधान सभा के कुल 11 सत्र हुए। 11वां सत्र 14-26 नवंबर तक चला। 26 नवंबर 1949 को हमारे संविधान का आखिरी मसौदा बनकर तैयार हुआ था।

24 नवंबर 1949 को 284 लोगों ने किए थे संविधान पर दस्तखत

जो संविधान बनकर तैयार हुआ, उस पर संविधान सभा के 284 सदस्यों ने 24 नवंबर 1949 को कॉन्स्टीट्यूशन हॉल में दस्तखत किए थे। इनमें 15 महिला सदस्य थीं।

26 जनवरी को लागू करने के पीछे था खास मकसद

वैसे तो संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को ही संविधान को पारित कर दिया था लेकिन इसे लागू करने के लिए जानबूझकर 26 जनवरी 1950 की तारीख चुनी गई क्योंकि इसी दिन 1930 में पूर्ण स्वराज की घोषणा हुई थी। इसकी याद में ही संविधान भी 26 जनवरी को ही प्रभावी किया गया।

देहरादून में हुई थी संविधान की छपाई

महान दस्तावेज संविधान की छपाई का काम देहरादून स्थित सर्वे ऑफ इंण्डिया को सौंपा गया, जिसने इसे करीब पांच साल में पूरा किया। तब संविधान की एक हजार प्रतियों प्रकाशित हुई थीं। उस प्रकाशन की एक प्रति संसद के पुस्तकालय में तो एक प्रति आज भी देहरादून में सुरक्षित है।

शब्दों की संख्या

संविधान के अंग्रेजी संस्करण कुल 21,17,369 शब्द हैं।

(यह पोस्ट IndiaFirst द्वारा नहीं लिखा गया है, मूल पोस्ट https://www.amarujala.com/पर प्रकाशित हुआ था)


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