आस्तीनों के सांपो से सावधान होने का वक्त

एक तरफ देश 71वां गणतंत्र दिवस के जश्न में डूबा है, तो दूसरी तरफ संविधान की ओट में कुछ देशविरोधी तत्व देश को तोड़ने की साजिश में लगे है। मजे की बात तो ये है कि देश को तोड़ने वालो का साथ वो लोग भी दे रहे है जो ये कहते कि आजादी में उनके पुरखो ने पसीने के साथ खून भी बहाया था। लेकिन आज वही सवाल के घेरे में है कि आखिर वो इन लोगो की मदद क्यो कर रहे है।

टुकड़े टुकड़े गैंग का एक नया विडियो सामने आया है, जिसमें असम को देश से तोड़ने की बात की जा रही है। शाहीन बाग में लोगों को उकसाया जा रहा है कि देश की सरकारी संपत्ति को कैसे नुकसान पहुंचाकर, असम को देश से काटा जा सकता है।लेकिन इस विडियो को देखने के बाद आज देश का विपक्ष चुप है वो क्यो नही ऐसे लोगों पर सख्त कर्यवाही करने की मांग कर रहा है, वो क्यो इनके धरने में जाकर इनको बल प्रदान कर रहा है? ये सवाल विपक्ष से पूछा ही जायेगा और इसका जवाब भी विपक्ष को देना चाहिये। वही दूसरी तरफ देश की जनता को भी सावधान होते हुए ऐसी सोच रखने वालो का हुक्का पानी बंद कर देना चाहिये जिससे देश में अमन बरकरार हो।

संविधान के नाम पर सियासत

CAA का विरोध करना गलत नही है लेकिन देश के संविधान को तोड़ना गलत है। संविधान बचाओ के नाम पर ही संविधान को तोड़ा जा रहा है जबकि संविधान में साफ लिखा है कि अगर आपको सरकार से किसी तरह की तकलीफ है तो वो शांति से उसका विरोध कर सकते है। जिस तरह से CAA को लेकर देश में आगजनी की जा रही है, सरकारी संपत्ति को तोड़ा जा रहा है, उससे ये साफ हो रहा है कि संविधान की आड में कुछ और ही सियासत की जा रही है। इतना ही नही बच्चो से पीएम को जान से मारने की साजिश रची जा रही है जो काफी भयावह है। लेकिन ये साजिश रच कौन रहा है, ये सवाल अगर पूछे तो पता चलता है कि ये वही लोग है जिन्हे चुनाव में जनता ने नकार दिया था जो लोग सरकार से सीधे टक्कर नही ले पा रहे थे, या यू कहे कि जिनके पास पीएम मोदी से सीधे टक्कराने की हिम्मत नही है वो पर्दे के पीछे से इस तरह से देश तोड़ने वालो की मदद कर रहे है। जो आने वाले दिनो में बहुत बड़ा खतरा बन सकता है।

आज लिखते लिखते मुझे उन फिल्मों की याद आ रही है जिसमे विलेन का साथ हीरो का कोई करीबी ही देता है लेकिन बाद में विलेन मतलब निकल जाने पर उसे भी मौत के घाट उतार देता है। कुछ इसी तरह का हाल उन लोगों का भी होगा जो देश के गद्दारों के साथ आज खड़े हो रहे है। इस लिये वक्त रहते ऐसे लोगो से उन लोगो को सावधान हो जाना चाहिये तो इस सोच में है कि सत्ता बदली तो उनके दिन फिर जायेंगे बल्कि उनके दिन और बुरे सुरू हो जायेगे।