अयोध्या से कतराने वालों को चुनावी साल में खूब पंसद आ रही अयोध्या 

यूं तो यूपी चुनाव का रण 2022 में है लेकिन रण की तैयारी में बड़े बड़े शुरमा अभी से मैदान में उतर आये है और अपने दांव पेंच के जरिये यूपी वालों को लुभाने में लगे है। लेकिन सबसे मजे की बात ये है कि सभी यूपी की चुनावी जंग से पहले प्रभु राम के दरबार अयोध्या जरूर जा रहे हैं और ये दिखाने में लगे हैं कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के वो साथ हैं। मतलब चुनाव से पहले सभी रामभक्ति में अपने आप को दूसरे से बेहतर बताने में जुट गये है।

अयोध्या नगरी पहुंचकर रामभक्तों के समर्थन की कवायद तेज

देश की सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही ये निर्णय लिया कि अयोध्या में प्रभु राम का मंदिर बनेगा वैसे ही विपक्ष की सभी पार्टियां ये बताने में जुट गई है कि वो भी इस फैसले का समर्थन करती है। और तो और राम भक्तो पर गोली चलवाने वाले सबसे पहले अयोध्या पहुंचकर भगवान राम के दर्शन करके अपने आपको हनुमान बताने में लगे है तो कभी उच्च जातियों को गाली देने वाले अयोध्या की धरती से उन्ही अपर कास्ट को मनाने के लिये जनसभा कर रहे है और ये बताने में लगे है कि प्रभु राम के वो सच्चे भक्त हैं। आलम ये है कि राम मंदिर का अस्तिव नहीं मानने वाले ओवैसी भी अयोध्या पहुंचकर एक वर्ग का विशेष वोट पाने की जुगत लगा रहे है। यानी चुनाव से पहले जो अपने भाषण में भगवा को प्रदेश से मिटाने की बात कर रहे है वो ही भगवा रंग में रंगे दिख रहे है जो ये साफ दिखाता है कि सत्ता के लिये ये किसी भी हद तक ये जा सकते है।

भ्रंम के जाल को भी बुनने में जुटा विपक्ष

उधर दूसरी तरफ अवसवादी इन नेताओं की हर चाल को यूपी की जनता देख रही है और समझ रही है। चुनाव से पहले इन नेताओं के बयान और अब सत्ता के लिये बदला इनका रुक इनकी चाल, चरित्र और चेहरा को बताता है। ऐसा नहीं है कि ये केवल रूप बदलकर जनता को चुनावी रंग दिखा रहे है। बल्कि एक से एक जुमला भी छोड़ रहे है कोई बोतला हुआ दिखाई दे रहा है कि वो सत्ता में आई तो अपर कास्ट के दिन बदल देगी तो कोई फ्री में गरीबों को सुविधा देने के नाम पर ठगने की तैयारी में लगा हुआ है। इसके साथ सरकार के कामकाज पर भी भ्रम फैलाने का काम किया जा रहा है। जहां वैक्सीनेशन में यूपी सबसे बेहतर कर रहा है तो झूठ फैलाया जा रहा है कि वैक्सीनेशन ठीक से नही हो रही है। इसी तरह रोड और हाइवे को लेकर भी ये बोला जा रहा है कि ये मेरा काम है जबकि पहले सिर्फ योजना बनती थी अब उस पर पूरा काम किया जा रहा है।

इन सबके बीच हां, अभी अयोध्या सबसे ज्यादा केंद्र में है और लगता यही है कि इस बार का चुनाव अयोध्या केंद्र बनकर ही रहे, पर इस चुनाव में प्रभु राम किसका बेड़ा पार लगाते है ये तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा लेकिन राम के नाम पर वोट कौन मांगता है ये अभी से दिखने लगा है।