PM केयर्स फंड की पारदर्शिता पर सवाल उठाने वालों पहले ये जरूर जान लो

केंद्र सरकार ने कोरोना जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए बनाए गए पीएम केयर्स फंड पर विपक्ष कई बार सवाल खड़ा करता रहा है। यहां तक कि इस फंड को लेकर कुछ दरबारी और डिजाइनर पत्रकार सरकार पर घोटाले का आरोप भी लगाते रहे है। जबकि सरकार ने हर वक्त साफ-गोसी के साथ सवाल खड़ा करने वालों को जवाब दिया है। लेकिन इसके बाद बी कुछ लोग इस मामले को कोर्ट तक लेकर गये जिसके बाद सरकार ने कोर्ट में जवाब दाखिल किया है जिसमे साफ बताया है कि प्रधानमंत्री राहत कोष एक चैरिटेबल ट्रस्ट है और इस ट्रस्ट को मिलने वाला पैसा, भारत सरकार का फंड बिल नहीं है और न ही इसकी राशि सरकार के संचित निधि में जमा होती है। आइये जानते है कि इसका हिसाब किताब कैसे रखा जाता है।

पीएम केयर्स फंड न तो RTI में और न ही राज्य के अधीन आ सकता है

प्रधानमंत्री कार्यालय की माने तो ये फंड न ही सूचना के अधिकार के तहत आता है और न ही इसे राज्य के अधीन किया जा सकता है। उन्होंने अपने जवाब में कहा, ‘संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत भले ही ट्रस्ट एक राज्य या अन्य ऑथोरिटी है, या फिर सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 2 H के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ है। लेकिन सामान्य तौर पर धारा 8 E और J में निहित प्रावधान, सूचना के अधिकार के मामले में तीसरे पक्ष की जानकारी का खुलासा करने की अनुमति नहीं देता है। संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत PM-CARES फंड को ‘राज्य’ का घोषित करने की मांग करने वाली याचिका के जवाब में सरकार की तरफ से अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री द्वारा स्थापित एक कोष और प्रधानमंत्री जैसे ट्रस्टियों और गृह, रक्षा और वित्त मंत्रियों वाले इस ट्रस्ट पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।

कैसे काम करता है पीएम केयर्स फंड, कौन करता है इसका ऑडिट?

पीएमओ ने अदालत को बताया कि ये ट्रस्ट मानद आधार पर पूरी पारदर्शिता के साथ काम करता है। इसके फंड का ऑडिट एक ऑडिटर द्वारा किया जाता है जो कि भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा तैयार पैनल का एक चार्टर्ड अकाउंटेंट करता है। उन्होंने बताया कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, ट्रस्ट द्वारा प्राप्त धन और उसके उपयोग का सारा ब्यौरा ऑडिट रिपोर्ट के रूप में ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर डाल दी जाती है।

ऑनलाइन मिलता है दान, वेबसाइट पर दी जाती है जानकारी

दान कैसे मिलता है इस सवाल के जवाब में सरकार की तरफ से बताया गया है कि ट्रस्ट को दान ऑनलाइन भुगतान, चेक या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से मिलते हैं। इस तरह प्राप्त राशि का ऑडिट किया जाता है और ट्रस्ट फंड के खर्च को वेबसाइट पर अपडेट करता है। गौरतलब है कि साल 2020 में कोविड -19 महामारी के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर्स फंड को बनाने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य देश के नागरिकों को सहायता प्रदान था। पीएम केयर्स फंड काफी ज्यादा मात्रा में फंड पहुंचा। दिसंबर 2020 में पीएम केयर्स फंड की आधिकारिक वेबसाइट पर इस बात की जानकारी दी गई कि यह फंड संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के तहत नहीं आता है।

फिलहाल सरकार ने एक बार फिर से कोर्ट को भी यकीन दिलाया कि ये फंड पूरी तरह से पारदर्शी है और इसपर किसी का अधिकार नहीं है और ये बात देश की जनता समझ गई है तभी पीएम मोदी के इस फंड में देश के हर इंसान ने मदद के तौर पर कुछ ना कुछ दान जरूर दिया है। इसके बावजूद भी कुछ लोग या तो इसे समझना नहीं चाहते या फिर समझ नहीं रहे।