‘कृषि कानून’ को ‘काला’ बताने वाले ये नहीं बता रहें हैं कि ‘काला’ क्या है

कृषि कानून को लेकर सड़क से संसद तक बहस का दौर देखा जा सकता है। एक पक्ष इस बिल को लेकर लगातार विरोध कर रहा है। तो सरकार इस बिल में क्या खामी है ये पूछने में लगी हुई है। जबकि तथाकथित किसानों को छोड़ दे तो अधिक से अधिक किसान इस बिल से खुश नजर आ रहे हैं। हालांकि इन सब के बीच राज्य सभा में कृषि मंत्र ने एक बार फिर से कृषि बिल को लेकर अपनी बात रखी और बोला कि ये बिल किसान को सबल बनायेगी।

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गरीब हितैषी योजनाएं बनाना सरकार का धर्म’

कृषि मंत्री तोमर ने राज्यसभा में बोला कि आज हम कह सकते हैं कि गरीब हितैषी योजनाओं के कारण गांव में रहने वालों के जीवन स्तर में परिवर्तन आया है। सरकार कोई भी हो, सरकार का धर्म यही है कि देश में रहने वाले गांव, गरीब, किसान के जीवन स्तर में बदलाव आए। मोदी सरकार की योजनाओं ने ऐसा करके दिखाया है फिर वो किसान फसल योजना हो या किसानो के लिये दूसरी योजना हो हर योजना के साथ किसान को मजबूत किया गया है। इस क्रम में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार ने ट्रेड एक्ट बनाया। उसमें यह प्रावधान है कि APMC के बाहर जो एरिया होगा, वह ट्रेड एरिया होगा। यह किसान का घर या खेत भी हो सकता है। APMC के बाहर कोई ट्रेड होगा तो किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लगेगा। जबकि APMC के भीतर राज्य सरकार टैक्स लेती है, जबकि बाहर केंद्र सरकार ने टैक्स खत्म किया है। ऐसे में पहली बार ये देख रहा हूं कि टैक्स खत्म करने पर कुछ लोग हंगामा कर रहे है। इसी तरह हमने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में किसान पर किसी भी सजा का प्रवधान नहीं किया है जबकि कई राज्य ऐसे है जहां किसानों को कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने में सजा का प्रवधान है और तो और पंजाब में तो सजा के साथ साथ 5 लाख रूपेय का जुर्माना भी रखा गया है जिससे ये पता चलता है कि किसान के साथ कौन सियासत कर रहा है।

कानून में काला क्या है?

इस मौके पर तंज कसते हुए कृषि मंत्री ने पूछा कि किसान बिल को काला कानून खूब बोलकर इसका विरोध किया जा रहा है। लेकिन अभी तक किसी ने बिल में क्या काला है ये पूछने में अभी तक जवाब नही मिल पाया है। हालांकि काला कानून बोल कर किसान के हित में आये बिल पर सियासत की जा रही है जो ये बताती है कि कुछ लोगो को इस बिल से कोई मतलब नही बल्कि मोदी जी का सिर्फ विरोध करना है इस लिये विरोध करने में जुटे है।

कृषि बिल पर पहले भी संसद में जब सरकार के मंत्री बोले थे तो दूसरी तरफ के लोग सिर्फ चुप बैठकर सुन रहे थे क्योंकि सत्ता पक्ष का जवाब ही ऐसा था ठीक आज भी यही माहौल देखने को मिला जब कृषि मंत्री ने तीर छोड़े और विपक्ष बचता हुआ दिखा।