इस बार आया राम, गया राम जैसे नेताओं को सिखाना होगा सबक

5 राज्यों की चुनावी मुनादी बजने के बाद से ही देश में राजनैतिक पार्टियों में तोड़-फोड़ और नेताओं के पाला बदलकर नये ठौर-ठिकाने तलाशने का नया दौर आ गया है और इसमे सबसे ज्यादा तेजी यूपी में देखा जा रहा है। जरूरी नहीं कि यह खेल हमेशा फायदे वाला ही हो, कई बार निष्ठाएं बदलने वाले नेता औंधे मुंह गिर गए, लेकिन सिलसिला थम नहीं रहा है। लेकिन जनता को ऐसे नेताओं से जरूर सावधान रहना चाहिए।

चुनाव के दौरान दल बदल का दौर शुरू

चुनाव करीब आते ही उन नेताओं में सबसे ज्यादा खलबली है जो पिछले 5 साल तक अपने इलाको में एक बार भी नहीं गए और जब टिकट कटने का नबंर आय़ा तो वो पार्टी बदलने में जुट गये है। आलम ये है कि वो 5 साल तक सत्ता में रहकर मलाई खाते रहे आज वही सरकार को नकारा बता रहे है और आरोप लगा रहे है। मजे की बात तो ये है कि ये वही देता है तो 2017 के चुनाव में पाला बदलकर आये थे। यानी की इन नेताओं का काम ही है। लेकिन चुनाव के वक्त अपना ईमान बदल देने से ये जरूर है कि पार्टी की छवि पर प्रभाव पड़ता है क्योकि इससे दूसरी पार्टी ज्यादा हमलावर हो जाती है

जनता को करना होगा इनका बहिष्कार

देश की सियासत में पाला बदले वालो नेताओं को सबक सिखाने के लिये अब देश की जनता को कमर कसना चाहिये और इन्हे ऐसी करारी हार देना चाहिये कि वो एक सबक बन जाये। इनके लिये वैसे ये लोग जनता को जाति, समुदाय और क्षेत्र के नाम पर भ्रमित करके वोट की सियासत करके दबाव की सियासत करते है ऐसे लोगो को हरा कर इनकी दुकान बंद करके भारत की जनता को ये दिखा देना चाहिये कि देश सच मायने में अब बदल चुका है और वो देश में मतलब परस्त सियासत करने वालो को नही छोड़ने वाली है। तभी सियासत करने वाले ये नेता सुधरेंगे और हमारे वोट को बिकाऊ नही बनायेंगे।

वैसे जैसे जैसे चुनावी गर्मी बढ़ रही है वैसे वैसे सियासी मेढ़क भी देखने को मिलेगे ऐसे मेढ़को को अब हमें पहचाना है और उन्हे बता देना है कि अब जनता मूर्ख नही बनेगी।

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