चीन मसले पर यही लग रहा, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे

जैसा कि हमारे रक्षा मंत्री ने साफ किया है कि चीन और भारत के बीच ये समझौता हो गया है कि वो अपनी पुरानी स्थिति पर फिर लौट जायेंगे जो एक तरह से भारत के लिये जीत से कम नही है।  पहली बार ऐसा हो रहा है कि चीन झुक रहा हो बावजूद इसके कुछ लोग मोदी सरकार पर हमला करके बोल रहे है कि चीन भारत की जमीन को हड़प रहा।

इतिहास की सबसे बड़ी गलती

आजादी के बाद खुद पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपने पास विदेश मंत्रालय रखा था और चीन विवाद को वही सुलझा रहे थे। चीन लगातार भारत को लेकर एक तरफ सख्त रुख अपना रहा था तो दूसरी तरफ नेहरू जी चीन को लेकर कुछ ज्यादा ही विनम्र हो रहे थे जिसका परिणाम ये हुआ कि चीन ने आक्साई चीन की जमीन पर कब्जा कर लिया। जबकि पंडित जी चीन के खिलाफ कड़ा रूख अपनाने की जगह चीन का समर्थन यूएन की स्थाई समिति के लिये कर रहे थे और दूसरी तरफ संसद में बयान दे रहे थे कि आक्साई चीन में तिनके के बराबर भी घास नही उगती, अगर चीन ने बंजर जमीन ले लिया तो क्या हुआ? हालांकि नेहरू जी के इस बयान पर उस वक्त संसद में मौजूद सांसद श्री महावीर त्यागी ने अपना सिर दिखाते हुए बोला था कि यहां पर भी एक बाल नही उगता तो क्या इसे कटवा दूं या फिर किसी दूसरे को दे दूं? लेकिन कही न कही ये बयान बता रहा है कि उस वक्त की सरकार किस तरह से चीन के दबाव में थी।

अब निकली चीन की हेकड़ी

शायद चीन को ये विश्वास नहीं था कि अब ये नया भारत है तभी तो उसने वही हरकत जारी रखी जो वो दशको से करता आ रहा है। लेकिन इस बार मोदी सरकार का दौर था इसीलिये चीन को उसकी गलती भारी पड़ गई और वो भी इतनी ज्यादा कि आज चीन को आर्थिक मोर्चे के साथ साथ कई मोर्चे में भारत के आगे झुकना पड़ रहा है तो सीमा पर भारतीय फौज के हौसले के आगे चीनी फौज के हौसले भी पस्त हो गये। दुनिया इस हकीकत को मान भी रही है लेकिन कुछ देश के लोग है जो इस बात को स्वीकार नहीं कर रहे है बल्कि वो यही समझ नही पा रहे है कि आखिर ऐसा कैसे हो गया।

ऐसे में तो यही लगता है कि अपनी सियासी गलतियों पर पर्दा डालने के लिये सिर्फ झूठ बोल कर हमला करना कुछ लोगों की फितरत हो गई है। लेकिन वो ये भूल गये है कि पहले भी वो ऐसा कर चुके है जिसका नतीजा ये हुआ कि वो सत्ता से और दूर हो गये।