कोलंबो-कुशीनगर का दोस्ती का ये नया रास्ता चीन को भी बहुत चुभेगा

पीएम मोदी ने यूपी के कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। पहली फ्लाइट श्रीलंका से आई जिसके साथ बौद्ध भिक्षुओं के साथ-साथ वहां के 4 मंत्री भी आए हैं। Colombo To Kushinagar की यह पहली फ्लाइट वैसे तो सामान्य दिखती है लेकिन इसका अपना कूटनीतिक महत्व है। यह श्रीलंका में चीन के बढ़ते प्रभाव को काउंटर करने के लिए भारत के सॉफ्ट पावर का कूटनीतिक इस्तेमाल है।

चीन की कुटिल चालों को काउंटर करने के लिए भारत की ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’

श्रीलंका को अपने चंगुल में फंसाकर चीन हिंद महासागर में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और भारत की घेरेबंदी करने में लगा है। चीन की इसी कुटिल चाल को काउंटर करने के लिए भारत ने अपने सॉफ्ट पावर का इस्तेमाल किया है। बौद्ध धर्म का जन्म भारत में ही हुआ था। यहीं पर बुद्ध को ज्ञान मिला था, यही पर उन्होंने अपना पहला उपदेश दिया था और यही पर उनका महापरिनिर्वाण भी हुआ था। भारत बौद्ध धर्म से अपने इसी कनेक्शन का इस्तेमाल सॉफ्ट पावर के तौर पर कर रहा है। यह एक अलग तरह की डिप्लोमेसी का उदाहरण है जिसे कल्चरल डिप्लोमेसी भी कह सकते है। भारत और श्रीलंका सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भाषायी बंधन से जुड़े हुए हैं। श्रीलंका में बौद्ध भिक्षुओं के सामाजिक, राजनैतिक प्रभाव से कोई इनकार नहीं कर सकता। अगर यह वर्ग अपने देश में चीन की कुटिल चालों के विरोध में खड़ा हो जाए तो बीजिंग के मंसूबे धरे के धरे रह जाएंगे।

श्रीलंका में तेजी से बढ़ रहा चीन का प्रभाव

पिछले कुछ वर्षों में श्रीलंका में चीन का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति उसे हिंद महासागर में रणनीतिक तौर पर बेहद अहम बनाती है। यही वजह है कि श्रीलंका में चीन का बढ़ता प्रभाव भारत की चिंता बढ़ाने वाला है। श्रीलंका के कई हाई प्रोफाइल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर चीन का तेजी से नियंत्रण बढ़ा है। श्रीलंका पर चीन का कर्ज बढ़ने के साथ ही यह आशंका भी गहराने लगी है कि जल्द ही वह चीन के आर्थिक उपनिवेश में तब्दील हो सकता है। कर्ज नहीं चुका पाने की वजह से ही श्रीलंका अपने हंबनटोटा पोर्ट को 99 साल के लिए चाइना मर्चेंट्स पोर्ट होल्डिंग को पट्टे पर देने के लिए मजबूर हुआ। हालांकि चीन की रणनीति भारत अच्छी तरह से समझ चुका है इसीलिये भारत ने भी श्रीलंका में चीन दखल के खिलाफ अपनी कूटनीति शुरू कर दी है जिसकी शुरूआत कुशीनगर एयरपोर्ट के जरिये की गई है।

इस बीच श्रीलंका से 141 साल बाद भगवान बुध्द के अवशेष भी कुशीनगर पहुंचे जो ये बताता है कि श्रीलंका और भारत के बीच में संबध और ज्यादा मधुर हो रहे है जो आने वाले दिनो में कही ना कही चीन को जरूर चुभेंगे।