कोरोना काल में कुछ यूं बदला होगा मानसून सत्र

जिस वक्त देश में कोरोना ने दस्तक दी थी, उस वक्त देश की संसद में बजट सत्र चल रहा था। हालाकि कोरोना के चलते इस सत्र को वक्त से पहले ही खत्म करना पड़ा जिसके बाद जो मानसून सत्र जुलाई से शुरू होता था उसे अब 14 सितंबर से शुरू होगा। कोरोना के चलते इस बार देश के लोकतंत्र के मंदिर में पहली बार कुछ नई व्यवस्था की गई है जिसके हिसाब से संसद के सत्र चलाए जायेगे। क्या क्या तैयारिया की गई है चलिए आपको बताते है।

बिना किसी अवकाश के चलेगा मानसून सत्र

संसद के इतिहास में ये पहला मौका होगा जब 14 सितंबर से शुरू होने वाला मानसून सत्र बिना कोई अवकाश 1 अक्टूबर तक चलेगा।  संसद के दोनों सदनों की कुल 18 बैठकें होंगी। हर दिन के पहले चार घंटे राज्यसभा काम करेगी और अगले चार घंटे लोकसभा। पहले दिन लोकसभा सुबह 9 बजे से 1 बजे तक बैठेगी। क्योंकि नियमों के मुताबिक, स्पीकर ओम बिड़ला को औपचारिक रूप से सदन के सदस्यों से अनुमति लेनी होगी। ताकि अपने कक्ष का इस्तेमाल किसी अन्य प्रायोजन के लिए किया जा सके। मसलन राज्यसभा का कामकाज, जिसके सदस्य कार्यवाही के दौरान निचले सदन के कक्ष में भी बैठेंगे। इसके बाद 15 सितंबर से राज्यसभा की कार्यवाही सुबह यानी 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगी और लोकसभा की कार्यवाही शाम 3 बजे से 7 बजे तक चलेंगी। सत्र शुरू होने से 72 घंटे के पहले सभी सांसदों का कोरोना वायरस टेस्ट किया जाएगा। सांसदों के साथ उनके स्टाफ का भी कोरोना टेस्ट किया जाएगा। सत्र के दौरान संसद परिसर में प्रवेश के समय थर्मल गन और थर्मल स्कैनर से तापमान की जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त संसद परिसर में सैनिटाइजेशन की व्यवस्था की जाएगी। यहां 40 स्थानों पर टचलैस सैनिटाइजर लगाए जाएंगे तथा इमरजेंसी मेडिकल टीम और एम्बुलेंस की व्यवस्था रहेगी।

11 अध्यादेश लाने को सरकार तैयार

सरकार ने इस बार संसद के सत्र में 11 अध्यादेश लाने की तैयारी की है। सरकार की माने तो ज्यादातर अध्यादेश संसदीय कार्य मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और कृषि मंत्रालय से संबंधित हैं। इसके साथ साथ सरकार ने हर तरह के विषय में बहस करने के लिए भी हामी भरी है। जनकारो की माने तो सरकार की तरफ से चीन का मुद्दा हो या फिर अर्थ जगत से जुड़े मुद्दे हर मुद्दे पर जवाब देने के लिए समय तय करने की बात कही है। हालाकि सरकार ने कोरोना को देखते हुए इस बार दोनो सदनो में प्रश्नकाल को खत्म कर दिया गया है। सरकार ने इसके पीछे की वजह कम समय में ज्यादा से ज्यादा काम देश हित में हो सके इसके लिये इस तरह की व्यवस्था की है।

बदली बदली देखेगी देश की संसद

इस तरह की असामान्य और अभूतपूर्व परिस्थितियों में संसद का यह पहला सत्र होगा। परिसर में हर किसी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन करने पर खास जोर रहेगा। इस मानसून सत्र में कई चीज़ें पहली बार दिखेंगी। बड़े डिस्प्ले स्क्रीन, दीर्घाओं से भागीदारी के लिए ढांचे, अल्ट्रावायलेट कीटाणुनाशक प्रकाश, दोनों सदनों के बीच स्पेशल केबल्स, पॉली कार्बोनेट सेपरेटर्स आदि। सत्र के लिए दोनों चैम्बर्स और दीर्घाओं का इस्तेमाल 1952 के बाद भारतीय संसद के इतिहास में पहली बार होगा। अधिकारियों की गैलरी और प्रेस गैलरी में बैठना भी सोशल डिस्टेंसिंग के मानदंडों के मुताबिक होगा। सचिवालय के सीमित संख्या में अधिकारियों को सदन के टेबल पर बैठने की अनुमति होगी। पत्रकारों को विदेशी गणमान्य व्यक्तियों के लिए बने विशेष बॉक्स में समायोजित किया जाएगा।

सरकार ने कोरोना काल में संसद सत्र को बुलाकर ये तो साफ तौर पर बता दिया है कि कुछ भी हो जाये लेकिन देश के विकास को लेकर कोई समझौता नही किया जायेगा। ऐसे में अब देखना ये होगा कि वक्त की कीमत को समझते हुए विपक्ष भी कुछ इस तरह का रोल अदा करता है या फिर सिर्फ हंगामा खड़ा करके वक्त ही जाया करेगा।