सपने जैसा लगने वाला है ये सच

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कभी सोचा न था कि अपनी छत से यूं हिमालय का दीदार हम करेंगे, लेकिन ये सपना नही बल्कि सच साबित हो रहा है। वैसे तो कोरोना के चलते सभी परेशान हैं, लेकिन कोरोना संकट के बीच एक अच्छी खबर ये है कि दुनिया में प्रदूषण का स्तर इस वक्त बहुत कम हो गया है, जिससे  वो हो रहा है जो कभी किसी ने सपने में नही सोचा था। जी हां बिहार हो या यूपी या फिर पंजाब के कई शहरों से मीलों दूर हिमालय की चोटी साफ देखी जा रही है।

आँखो को विश्वास नही हो रहा

ज्यादा पीछे न जायें सिर्फ 2019 की बात करें तो प्रदूषण के चलते देश के हर शहर का हाल बेहाल था आलम ये था कि हम लोग ये भूल गये थे कि आसमान का रंग नीला होता है क्योकि हर वक्त प्रदूषण के बादलों के चलते ये काला ही दिखता था। सरकारों ने प्रदूषण को खत्म करने के लिये यूं तो कई योजनाए बनाई और चलाई भी लेकिन प्रदूषण रूपी काल खत्म होने का नाम ही नही ले रहा था, लेकिन कोरोना सकंट में हुए लॉकडाउन ने प्रदूषण को ऐसा लॉकडाउन किया है कि आसमान ही नही बल्कि कई शहरों से तो मीलों दूर हिमालय की चोटियां साफ दिखाई दे रही है। पंजाब के जालंधर, होशियारपुर और कपूरथला से जहां हिमाचल की बर्फ वाले पहाड़ो का दीदार हो रहा है तो दूसरी तरफ यूपी के पीलीभीत बरेली से उतराखंड के पहाड़ो को निहारा जा सकता है। इतना ही नही अब बिहार के सीतामढ़ी शहर से नेपाल के पर्वत भी साफ दिख रहे हैं यहां ये बताना जरूरी है कि इन शहरों से पहाड़ो की दूरी कई सौ किलोमीटर की है लेकिन इसके बाद भी ये पहाड़ प्रदूषण छटने के चलते साफ तौर पर दिख रहे हैं। जो किसी सपने से कम नही है।

गंगा और नर्मदा का पानी भी हुआ अविरल, निर्मल

सिर्फ प्रदूषण का असर आसमान में ही नही देखा जा सकता बल्कि देश की नदियों में भी इसका असर दिख रहा है. कल कारखाने बंद होने के चलते गंगा और नर्मदा सहित कई नदियों में प्रदूषण नही मिल पा रहा है। जिससे इन नदियों का पानी इतना साफ हो गया है कि वो पीने योग्य हो गया है। यहां हम आपको ये बता दें कि नमामी गंगे योजना के तहत गंगा को पहले साफ किया जा रहा था और देश के कई बड़े छोटे नालों को गंगा से बंद कर दिया गया था जिसके बाद गंगा में प्रदूषण कुछ हद तक कम हो गया था, लेकिन लॉकडाउन ने तो इसमे चार चांद ही लगा दिये है। जिससे यमुना ,गंगा नर्मदा के पानी का रंग ही बदल गया है।

लॉकडाउन के चलते ही देश में दूसरी बीमारियों पर भी लगाम लगी है। सबसे ज्यादा अशर अस्थमा के मरीजों में देखा जा रहा है। लॉकडाउन से पहले जहां अस्थमा के नए मरीजों की संख्या देशभर में 5 हजार होती थी तो अब इसकी संख्या 1250 के करीब हो गई है। इसी तरह 55 फीसदी दवा की ब्रिकी भी घटी है। लेकिन अब हमे ये स्थिति बरकरार रखनी है इसके लिये सरकार को और हम सबको कुछ ऐसे ठोस कदम उठाने चाहिये जिससे लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी प्रदूषण न बढ़े।


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