बिना बैन किए बैंड बजाना इसी को कहते हैं: सरकार ने ट्विटर से छीना लीगल इम्युनिटी

भारत में अगर कारोबार करना है तो भारत के संविधान के आधार पर ही चलना होगा और जो कानून को नहीं मानेगा उसपर सख्त से सख्त कार्यवाही होगी। ये बात मोदी सरकार ने ट्विटर पर सख्ती दिखाते हुए साफ कर दिया। वैसे तो ट्वीटर खुद को ‘अभिव्‍यक्ति की आजादी के झंडाबरदार’ के रूप में पेश करता है, मगर इंटरमिडियरी गाइडलाइंस का पालन न करने का रास्‍ता चुनता है। सरकार की माने तो गाजियाबाद में हुई घटना का उदाहरण देकर कहा कि फेक न्‍यूज के खिलाफ लड़ाई में ट्विटर का मनमाना रवैया सामने आ गया।

मीडिया में हेरफेर करता है ट्विटर

मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस बाबत कहा कि ‘इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि ट्विटर देश के कानून की तरफ से अनिवार्य प्रक्रिया का पालन करने से इनकार करके यूजर्स की शिकायतों को दूर करने के लिए कोई सिस्टम नहीं बनाता। इसके आलावा, यह फ्लैग करने की नीति चुनता है और मीडिया में हेरफेर करता है’। प्रसाद ने कहा, “ट्विटर अपनी जांच को लेकर काफी उत्साहित रहा है, लेकिन कई मामलों में काम करने में ये पूरी तरह असफल रहा है और साथ ही गलत सूचनाओं से लड़ने में भी अपनी इच्छा या उद्देश्य की तरफ कोई इशारा नहीं करता है”। उन्होंने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हुई घटना का उदाहरण देकर कहा कि फेक न्‍यूज के खिलाफ लड़ाई में ट्विटर का मनमाना रवैया सामने आ गया जिसके बाद सरकार ने ये कदम उठाया है।

Fact Check: क्या भारत सरकार लगा रही ट्विटर पर बैन? जानें वायरल मैसेज की  सच्चाई | Fact check: Will Twitter be banned in India by modi government -  Hindi Oneindia

भारतीय कंपनियां करती हैं विदेशों के सभी नियमों का पालन

सरकार ने अपना रुख साफ करते हुए साफ किया कि भारतीय कंपनियां जब विदेश में काम करती है तो वो वहां के कानून के हिसाब से ही चलती ऐसे में ट्विटर को भी देश में बने कानून के हिसाब से चलना चाहिए। आईटी मंत्री रविशंकर जी ने साफ किया कि कानून का शासन भारतीय समाज की आधारशिला है। अभिव्यक्ति की आजादी की संवैधानिक गारंटी के लिए भारत की प्रतिबद्धता को G-7 शिखर सम्मेलन में भी फिर से दोहराया गया है। लेकिन अगर कोई विदेशी कंपनी मानती है कि वे भारत में खुद को ‘आजादी की आवाज देने’ के तौर पर पेश कर या फ्री स्‍पीच का झंडा उठाकर देश के कानून का पालन करने से बच सकते हैं तो ऐसे प्रयास गलत हैं।

सरकार के इस रूख से ये तो साफ हो गया है कि अब अगर देश में गलत खबर दिखाया या फिर अफवाह फैलाने में मदद की तो उसकी खैर नहीं और हो भी क्यो ना क्योकि इनकी जरा सी नासमझी के चलते नजाने कितने घरो को भुगतना पड़ता है। पिछले कुछ सालों में हमने इस बाबत देखा भी है और सुना भी है। ऐसे में सरकार का ये कदम कुछ फेक न्यूज फैलाने वालो के लिए एक चेतावनी है कि अगर अब ऐसा किया तो वो सख्त से सख्त सजा के लिये भी तैयार रहे।