हरिवंश जी के इस रूप ने लोकतंत्र में आत्मीयता, सादगी और भावनाओं को फिर से जगह दे दी

आज लोकतंत्र की वो तस्वीर देखने को मिली जिसको देखकर हर देशवासी गर्व महसूस कर रहा है और बोल रहा है कि भारतीय लोकतंत्र में आज भी गांधी और जेपी की विचारधारा जिंदा है। कुछ इसी बात का उदाहरण पेश किया राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश बाबू ने जब वो उन सासंदों को चाय पिलाने राज्यसभा पहुंच गये जो उनके खिलाफ ही मोर्चा खोले बैठे थे। लेकिन इससे ये तो स्पष्ट हो गया कि भारत के लोकतंत्र की नींव बहुत मजबूत है और अपनी जड़ों से जुड़ी हुई है। आज हरिवंश बाबू के इस एक कदम से उनकी तारीफ पूरे देश में हो रही है।

पीएम मोदी ने उपसभापति को बताया उदार

खुद पीएम मोदी ने उपसभापति की तारीफ में कसीदे पढ़े पीएम ने ट्वीट करके लिखा “हर किसी ने देखा कि दो दिन पहले लोकतंत्र के मंदिर में उनको किस प्रकार अपमानित किया गया, उन पर हमला किया गया और फिर वही लोग उनके खिलाफ धरने पर भी बैठ गए। लेकिन आपको आनंद होगा कि आज हरिवंश जी ने उन्हीं लोगों को सवेरे-सवेरे अपने घर से चाय ले जाकर पिलाई।“ इसके अलावा पीएम मोदी ने एक अन्य ट्वीट भी किया, जिसमें पीएम ने कहा, “यह हरिवंश जी की उदारता और महानता को दर्शाता है।लोकतंत्र के लिए इससे खूबसूरत संदेश और क्या हो सकता है। मैं उन्हें इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।“

हरिवंश बाबू के खत की हर तरफ चर्चा

उधर रविवार को घटी घटना के बाद उपसभापति ने एक खत राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को लिखा।  उनका ये पत्र जिन जिन लोगो ने पढ़ा वो भावुक दिखे। खुद पीएम ने इस खत पर लिखा कि माननीय राष्ट्रपति जी को माननीय हरिवंश जी ने जो पत्र लिखा, उसे मैंने पढ़ा। पत्र के एक-एक शब्द ने लोकतंत्र के प्रति हमारी आस्था को नया विश्वास दिया है. यह पत्र प्रेरक भी है और प्रशंसनीय भी। इसमें सच्चाई भी है और संवेदनाएं भी मेरा आग्रह है, सभी देशवासी इसे जरूर पढ़ें ‘ सच में जिस तरह से इस पत्र में अपने मन की बात हरिवंश बाबू ने की है उससे सही में लगता है कि लोकतंत्र पर विश्वास करने वाले ऐसे घटना से आहत जरूर हुए होगे। ऐसे में अब उस पक्ष से भी ये कोशिश होनी चाहिये जिन्होने लोकतंत्र को बदनाम करने में कोई कोरकसर नही छोड़ा था। भारत में हमेसा एक स्वस्थ लोकतंत्र देखा है. जहां चर्चा, तर्क कुतर्क, की गरमा गर्मी देखी गई है लेकिन हिसा का कोई स्थान नही रहा है। ऐसे में लोकतंत्र के मंदिर में जो कुछ रविवार को हुआ वो जरूर सवाल खड़ा करता है कि आखिर आज हम इतने उत्तेजित क्यो हो जाते है।

हरिवंश बाबू ने उपसभापति होने की जिस तरह से जिम्मेदारी निभाई है, वो इतिहास में दर्ज होगी। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष दोनो को एक नजर से देखने का तो काम उन्होने किया है उसे सालों नही भुलाया जा सकता है। तो दूसरी तरफ उनकी इस कदम से ये बात भी दूर तलक जायेगी कि जैसे जैसे हमारा देश  आगे बढ़ रहा है वैसे वैसे हमारा लोकतंत्र और मजबूत होकर निखर रहा है जो नये भारत के लिये एक बहुत अच्छी पहल कही जा सकती है।