बीजेपी का ये फैसला उनके संस्कार को दर्शाता है

5 राज्यों में चुनाव की तारीख आने के बाद से ही सभी राजनैतिक दल उम्मीदवारों को खोजने में लग चुके है। लेकिन इस मामले में दूसरी पार्टियों से बीजेपी अलग है और वो हम ऐसे नहीं कह रहे बल्कि पूरे सबूत के साथ बता जा रहे है। कारण गोवा की पणजी सीट है जहां से पूर्व सीएम मनोहर पर्रिकर के बेटे ने टिकट मांगा लेकिन पार्टी ने साफ कर दिया है कि वो सिर्फ नेता के बेटे होने के चलते टिकट नही देती है।

पर्रिकर के बेटे को टिकट देने से इनकार

मनोहर पर्रिकर के बड़े बेटे पणजी सीट से उपचुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन बीजेपी ने परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देने के नाम पर उत्पल पर्रिकर को टिकट देने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि अब भी बीजेपी का यही कहना है। जब तक मनोहर पर्रिकर जिंदा थे, तब तक उत्पल ने राजनीति में कभी कोई रूचि नहीं दिखाई। हालांकि अब वह अपने पिता की राजनीतिक विरासत पर अपनी दावेदारी लगातार पेश कर रहे हैं। कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें पणजी सीट नहीं मिली तो वह कड़ा कदम इख्तियार कर सकते हैं जो पार्टी का चाल और चरित्र बताता है।

सरकार में भी दिखते है ऐसे संस्कार

इसी तरह का संस्कार मोदी सरकार में भी देखने को मिलता है जहां काम के आधार पर मंत्री पद दिया जाता है तो पार्टी में भी ऐसा ही चलता है तभी तो पार्टी का अध्यक्ष पद में हमेशा एक छोटा सा कार्यकता भी पार्टी का अध्यक्ष बन जाता है। फिर वो अमित शाह हो या फिर जेपी नड्डा या फिर नितिन गडकरी। तभी एक वर्कर की तरह पार्टी में शामिल हुए और उसके बाद वो पार्टी के सबसे बड़े पद तक पहुंचे। वैसे भी मोदी जी अपनी टीम में उन लोगों को जगह देते हुए दिखाई देते है जिनके बारे में कभी सोचा भी नही जाता

यही फर्क है बीजेपी और दूसरी पार्टियों में जहां पार्टी का चेहरा या परिवार को देखकर टिकट दिया जाता रहा है। लेकिन बीजेपी में ऐसे संस्कार बहुत कम है जनता को तभी तो इन पर विश्वास ज्यादा है क्योकि जनता के बीच से ही नेता चुनकर आते है और फिर जन और देश की सेवा करते है।

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