सोच रहा हूँ , होटल, रिसोर्ट का व्यापार शुरू कर लें

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सोच रहा हूँ कि होटल या रिसोर्ट का व्यापार शुरू कर लें, वैसे तो कोरोना के चलते सभी धंधे आजकल मंदे चल रहे हैं, वैसे मोदी सरकार कारोबार को बेहतर बनाने के लिए लगी है लेकिन होटल और रिसोर्ट का ऐसा कारोबार है जिसको कुछ नेताओ की कृपा खूब बरस रही है और लगता यही है जैसे इन लोगो ने इस कारोबार की नैया पार लगाने का बीड़ा उठा रखा है।

लोकतंत्र है तो होटल है-रिसोर्ट है

ये बात बिलकुल सच आज साबित हो रही है कि देश में लोकतंत्र जब तक रहेगा तब तक  होटल और रिसोर्ट का कारोबार फलता फूलता रहेगा। यही नही कई लोगों के लिए तो आज  लोकतंत्र ही परमानेंट होटल और रिसोर्ट है। लोकतंत्र में होटल-रिसोर्ट लगातार चर्चा में रहते हैं। अभी कर्नाटक वाले आए थे, फिर मध्य प्रदेश वाले आए अब राजस्थान वालों की बुकिंग हो गई है। सुना है कि महाराष्ट्र वालों से बात चल रही है और उम्मीद भी यही लग रहा है कि जल्द ही वो भी आ सकते हैं। आलम ये है कि मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक हो-न हो, विधायक की दौड़ होटल या रिसोर्ट तक हो रही है, बार-बार हो रही है। विधायकों की इतनी आवाजाही रिसोर्ट में हो रही है कि लघु विधानसभा पांच सितारा होटल या रिसोर्ट में स्थापित करने की मांग भी उठ सकती है। उठनी भी चाहिए, क्योंकि जब विधायकों को अपना तमाम वक्त वहीं गुजारना है तो पास में विधानसभा भी आ जाए तो काम आसान हो जाएगा। होटल-रिसोर्ट विधानसभा में तब्दील कर दिए जाएं ताकि खर्च भी बचेगा और विधायकों की भागदौड़ भी। काम तनिक आसान करने के लिए तो यह और भी अच्छा होगा कि होटल-रिसोर्ट ही विधानसभा में तब्दील कर दिए जाएं ताकि एक पंथ-दो काज हो जाए। खर्च भी बचेगा और विधायकों की भागदौड़ भी। वैसे भी अब तो विधान सभाएं ज्यादा दिन चलती भी नहीं हैं।

ड्रैगन से कोई कंपटीशन नहीं

होटल-रिसोर्ट के धंधे की एक बहुत ही जोरदार खूबी यह है कि इसमें चीन से कंपटीशन नहीं है। धंधा वही बढ़िया जिसमें चीन से कंपटीशन न हो। चीन से कंपटीशन हो तो आफत आ जाती है। कस्टमर पर मानसिक दबाव आ जाता है कि सस्ते चीनी आइटम खरीदकर रकम बचाऊं या महंगा खरीदकर देशभक्ति की भावना बढ़ाऊं। पेचीदा प्रश्न हो जाता है। होटल-रिसोर्ट के धंधे चीनी कंपटीशन से मुक्त हैं। अब तो मुक्त रहने के आसार और बढ़ गए हैं, क्योंकि चीनी कंपनियां देश से बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी कर रही है। इसलिए इसका खतरा भी नहीं कि वे होटल-रिसोर्ट खोलकर कंपटीशन में आ जाएंगी। इसके साथ साथ ये तो पक्का मानकर चलो कि अगर आपकी सेवा सतकार में कोई कमी नही रही और नेता जी से कोई मिल नही पाया तो समझो हर बार ये लोग सत्ता के पैसे में जमा होने यहां चले आएंगे और हो भी क्यों न आखिर जनता की सेवा के लिए रात दिन लगे रहते हैं ये  ऐसा वो अपने लंबे लंबे भाषणो में बताते हैं लेकिन जब विदेश कही घूमने जाते हैं तो मीडिया नेता जी घूमने गये घूमने गये बोल कर छवि खराब करती है। ऐसे में ये तरीका सबसे बढ़िया है कि थोड़ी  सैर सपाटा भी हो जाता है और लोकतंत्र खतरे में भी नही पड़ता.. क्यों है न सही।

ऐसे में अंत में तो हम यही बोलेंगे कि बात निकली है तो दूर तलक जायेगी क्योंकि जनता कोरोना से परेशान है और  वो चाहती है कि उसका जनसेवक इस दुख की घड़ी में उसके साथ खड़ा दिखे लेकिन ये देश का दुर्भाग्य ही है कि जनसेवक अपने आपको बचाने में लगे हैं और अपनो को ही रिसोर्ट में बंद करके शेर बन रहे हैं। ऐसी राजनीत तो खत्म होना चाहिए बस जनता से यही आवाहन मैं करना चाहूंगा।


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