पुरातन परंपरा को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के हिसाब से ढालने की है जरूरत – पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी को तीस से अधिक योजनाओं की सौगात देने के लिए पहुंचे। अपने छह घंटे से अधिक समय तक के प्रवास पर सुबह 10.25 बजे लाल बहादुर शास्‍त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बाबतपुर पहुंचे। इसके बाद जंगमबाड़ी मठ में आयोजित समारोह में शामिल होने के बाद चंदौली के पड़ाव में पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा का लोकार्पण करने पहुंचे। प्रतिमा का लो‍कार्पण करने के बाद उन्होंने स्माारक परिसर का भी अवलोकन किया। तत्पश्चाअत उन्होंने 36 परियोजनाओं का लोकार्पण और 14 परियोजनाओं का शिलान्यास किया।

‘काशी एक रुप अनेक’ में दिखाई भविष्य की झलक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे का असल मकसद तीसरे प्रमुख आयोजन में परिलक्षित हुआ। ‘काशी एक रुप अनेक’ थीम पर ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर में वाणिज्यिक आयोजन में प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यकवस्थाो को पांच ट्रिलियन करने की रुपरेखा को न सिर्फ सामने रखा बल्कि इस लक्ष्ये को हासिल करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों और भविष्यि के प्रयासों की भी झलक पेश कर कारोबारियों को सरकार की ओर से संबल दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘काशी एक, रुप अनेक’ में हिस्सा लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दीनदयाल हस्तकला संकुल में हस्त शिल्प उत्पादकों से जुड़े दो दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न देशों से आने वाले खरीरदारों और कारीगरों से संवाद किया।

आयोजन को बताया स्वंरोजगार का कुंभ

पीएम ने ‘काशी एक, रुप अनेक’ कार्यक्रम को स्वरोजगार के कुंभ का नाम दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यहां भांति-भांति के कलाकार, शिल्पकार एक ही छत के नीचे हैं। एक-एक धागे को जोड़कर, मिट्टी के एक-एक कण को घटकर, बेहतरीन निर्माण करने वालों के साथ, दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों को चलाने वाले, एक ही छत के नीचे बैठे हैं। सच में, काशी एक है, लेकिन उसके रूप अनेक हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की हमेशा से ही ये शक्ति रही है कि यहां के हर क्षेत्र, हर जिले की पहचान से कोई ना कोई विशेष कला, विशेष आर्ट और विशेष उत्पाद जुड़ा रहा है। सदियों से परंपरा रही है और कारोबारियों ने इसका प्रचार दुनिया में किया है। हमारे पास संसाधनों की और कौशल की कभी कमी नहीं रही है, बस एक व्यापक सोच के साथ काम करने की जरूरत है। जरूरत बस इस कहानी को दुनिया तक पहुंचाने की है। उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजायन इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।

मिल रहा सरकारी साथ

पीएम मोदी ने अपने बनारस दौरे पर ये भी कहा कि “उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजायन द्वारा पिछले 2 वर्षों में, 30 जिलों के 3500 से ज्यादा शिल्पकारों, बुनकरों को डिजाइन में सहायता दी गई है। क्राफ्ट से जुड़े उत्पादों में सुधार के लिए एक हजार कलाकारों को Tool Kit भी दिए गए हैं।

बदली है काशी की उद्योग परंपरा

पीएम मोदी ने कहा कि पारंपरिक उद्योगों को मार्केट और तकनीक देने की जरूरत है। यही प्रयास कर रहे हैं। सोलर चरखा, लूम, चाक उदाहरण हैं। इस संकुल में भी सरकार के प्रयास का परिणाम है। 2014 से पहले बनारस का सामान्य बुनकर और निर्यातक ऑनलाइन संवाद नहीं कर सकता था, क्योंकि मंच नहीं था। सरकारों के पास पैसा या समझ नहीं थी नहीं कह सकता। हर व्यक्ति को सशक्त और स्वावलंबी बनाने की जरूरत है। पूरे देश में अनेक केंद्र बनाए गए हैं जहां सामान्य हस्तशिल्पी उत्पाद प्रदर्शित कर सकें।