मोदी सरकार के शासन में गरीबों की संख्या में आई भारी गिरावट: अध्ययन

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार पूरी तरह से गरीबों को समर्पित है। उनकी नीतियों, योजनाओं और अभियानों का असर है कि तेजी से देश की गरीबी खत्म हो रही है। गरीबी रेखा के एक शोध के अनुसार, भारत में गरीबी 2011 में 27 करोड़ से घटकर 2017 में 8.4 करोड़ रह गई। 2011 में, 14.9 प्रतिशत भारतीय आबादी गरीबी में रहती थी। तब से यह संख्या 2017 में घटकर 7 फीसदी रह गई है।

इस शोध को नेशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) के सामने पेश किया गया है। गरीबी में कमी का श्रेय महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (MGNREGA), प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, पीएम किसान योजना और एलपीजी सब्सिडी जैसी उच्च विकास दर और सरकारी योजनाओं को दिया गया है।

मोदी सरकार की योजनाओं का असर एक नजर में –

जन धन योजना से आर्थिक सशक्तिकरण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 अगस्त, 2014 को गरीबों को बैंकों से जोड़ने के लिए जन धन योजना की शुरुआत की थी। मोदी सरकार की प्रमुख जन कल्याणकारी योजनाओ में से एक ‘प्रधानमंत्री जनधन योजना’ दिन-प्रतिदिन अपने नाम नए-नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। ‘प्रधानमंत्री जनधन योजना’ का उद्देश्य अब तक बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोगों को बैंकिंग प्रणाली के दायरे में लाना है। यह योजना अपने मकसद को पूरा करने में लगातार कामयाब हो रही है। इस योजना के तहत बैंक खातों तक पहुंच रखने वाले वयस्कों का प्रतिशत 2014 में 53 प्रतिशत था जो 2017 में बढ़कर 80 प्रतिशत हो गया। वित्तीय समावेशन कार्यक्रम के तहत पिछले पांच वर्षों में खोले गए नए जन धन बैंक खातों की संख्या पूरी अमेरिकी आबादी के बराबर है। जन धन योजना के तहत 12 जुलाई, 2019 तक 35 करोड़ 75 लाख नए बैंक खाते खोले गए।

मुद्रा ऋण योजना से दूर हो रही गरीबी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुद्रा बैंक योजना 8 अप्रैल 2015 को शुरु की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पढ़े-लिखे नौजवानों को रोजगार प्रदान करना है। मुद्रा योजना से लोग 10 लाख रुपए तक आसानी से लोन ले सकते हैं और अपने कारोबार को बड़ा सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई मुद्रा योजना के कारण बड़े स्तर पर स्वरोजगार को बढ़ावा मिला है। इस योजना ने अल्प समय में ही कई लोगों की जिंदगी बदल दी है। इस योजना के लाभार्थियों में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं, यानि महिलाओं की आर्थिक उन्नति में भी यह योजना क्रांतिकारी साबित हुई है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत जनवरी 2020 तक महिलाओं को 15 करोड़ ऋण दिया गया। केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के अनुसार 4.78 लाख करोड़ रुपये की राशि के 15 करोड़ से अधिक ऋण प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत महिलाओं को दिए गए हैं।

सौभाग्य योजना से घर-घर बिजली

ग्रामीण भारत की इसी सबसे बड़ी परेशानी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सौभाग्य योजना का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री को उम्मीद है कि जिस प्रकार उज्ज्वला योजना ने करोड़ों महिलाओं के जीवन को ना सिर्फ धुएँ से मुक्ति दिलाकर उनके स्वास्थ्य की रक्षा की बल्कि उनका जीवन भी आसान बनाया उसी प्रकार सौभाग्य योजना भी ग्रामीण भारत की तसवीर बदलने में कामयाब रहेगी। सौभाग्य योजना और दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना के तहत मोदी सरकार ने उन घरो मे भी उजियारा ला दिया है जिन्होने कभी बल्ब का प्रकाश भी नही देखा था। आज सरकार की इस योजना का फायदा करीब 3 करोड परिवार उठा रहे है और देश के विकास के भागीदार बन रहे है।

स्वास्थ्य बीमा आयुष्मान भारत

23 सितंबर 2018 को लॉन्च की गई यह स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसके तहत अब तक 84 लाख से अधिक गरीब मरीज लाभान्वित हो चुके हैं। इस योजना के अंतर्गत देश के नागरिकों को अच्छे स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार प्रत्येक लाभार्थी परिवार को 500000 तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराती है तथा उनको इस लायक बनाती है कि वह अस्पतालों में गंभीर बीमारियों का इलाज निशुल्क करा सके। इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा विभिन्न सरकारी सरकारी अस्पतालों को शामिल किया गया है एवं 1350 सूचीबद्ध बीमारियों का इलाज सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

उज्जवला योजना

उज्जवला योजना एक समाज कल्याण योजना है, जिसे ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लागू किया गया है। इस योजना के तहत बड़ी संख्या में गरीब परिवारों को फ्री में गैस कनेक्शन बांटे गए। इससे सबसे बड़ा फायदा उन गरीब माताओं-बहनों को हुआ, जो धुएं में खाना बनाने को मजबूर थीं। पीएम मोदी ने 1 मई 2016 को बलिया में इस योजना को लॉन्च किया था। इसके तहत गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करने वाले परिवारों के लिए 8 करोड़ एलपीजी कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं।

 


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