रूस यूक्रेन जंग के बीच दुनिया को भारत का साथ पंसद है

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर दुनिया में मची उथल-पुथल के बीच भारत अचानक वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ गया है। इस सिलसिले में पिछले हफ्ते की बात करे तो दुनियाभर के करीब 7 राजनयिकों के दौरे हो चुके है तो इस हफ्ते 4 विदेशी नेताओं ने भारत का दौरा कर लिया है तो 2 अप्रैल नेपाल के पीएम का दौरा भी प्रस्तावित है जो भारत की विश्व में बढ़ती धमक साफ बता रहा है।

भारत से दोस्ती के लिए तैयार समूचा विश्व

जो लोग बोलते है कि भारत की विदेश नीति में दम नहीं है और इसी का असर है कि चीन और पाकिस्तान एक होकर ज्यादा मजबूत हो रहे है वो ये जान लें कि आज भारत की विदेशनीति का ही जलवा है कि विश्व के सभी देश की जुबान में भारत के साथ दोस्ती करने की बात होती है। इसको आप ऐसे भी देख सकते है कि पिछले हफ्ते चीन, मैक्सिको, ब्रिटेन और रूस के विदेश मंत्रियों की भारत यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है तो जापान के पीएम ने भारत दौरा करके भारत में पहले से ज्यादा निवेश करने की योजना पर साइन किये। वही ऑस्ट्रेलिया ने भी पीएम मोदी के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग कर भारत में निवेश बढाने का संदेश दिया। इस बीच जर्मनी के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के सलाहकार भी भारत के दौरे पर हैं। अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का भारत दौरा भी हुआ। सभी ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की अपनी बात रखी जो भारत की विदेश नीति को दिखलाता है।

रूस से तेल खरीदने में बाहरी दबाव मंजूर नहीं

इश दौरान भारत ने अमेरिका सहित पश्चिम देशों के आये नेताओं से साफ और दो टूक बोला है कि रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत किसी का दबाव मंजूर नहीं करेगा। भारत वही कदम उठायेगा जिसमें देश और देशवासियों का हित होगा। गौरतलब है कि रूस की कोशिश है कि भारत तेल और गैस उससे खरीदे, क्योंकि यूरोप में उसकी आपूर्ति घटने जा रही है। ऐसे में भारत अपना फायदा देखकर ही कदम उठायेगा। वही दूसरी तरफ भारत आये चीन के विदेशमंत्री को भी साफ लहजे में समझा चुका है कि भारत से अगर दोस्ती करती है तो पहले सीमा पर पुरानी स्थिति में जाना होगा जो ये साफ बताता है कि आज भारत की विश्व में क्या छवि बन गई है। आज भारत आंख मिलाकर बात करता है और अपने हितों पर ही करता है।

विश्वभर से आये विदेशी नेताओं की यात्रा से यही साफ होता है कि आज विश्व को भारत की जरूरत पड़ रही है और ये सब हुआ है मोदी सरकार की एक कुशल कूटनीति के चलते जिस पर कुछ लोग तंज कसते थे कि एक चायवाला विदेशनीति में कुछ नही कर पायेगा।