कोरोना, तालिबान से दुनिया परेशान, ऐसे में दुनिया को UN में पीएम मोदी की स्पीच का इंतजार

पीएम मोदी अमेरिका जा रहे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब कोरोना के कहर से दुनियाभर के मुल्क अपनी अर्थव्यवस्था की गाड़ी को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। उधर पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान में आतंकी संगठन तालिबान ने सत्ता हथिया ली है। ऐसे में अमेरिका समेत पूरी दुनिया की नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन पर हैं। वह 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र को संबोधित करेंगे। दरअसल, पीएम मोदी के संबोधन टू-द-पॉइट्स और धारदार रहे हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मंच से आतंकवाद पर पाकिस्तान को घेरा तो वहीं चीन को भी सुनाया जो सुरक्षा परिषद में आतंकियों को बचाने का काम करता है। उन्होंने हमेशा दुनिया के सामने तत्कालीन प्रमुख मुद्दे उठाए हैं। PM ने न सिर्फ भारत के महत्व और चिंताओं की बात की है बल्कि घरेलू मोर्चे पर मिली उपलब्धियों से भी दुनिया को रूबरू कराया है।

मोदी पर क्यों है दुनिया की नजरें

विकसित देशों की बातें तो वे जोरदार तरीके से वैश्विक मंच पर रख लेते हैं लेकिन विकासशील देशों की प्रखर आवाज भारत बनता आ रहा है। सुरक्षा परिषद के सदस्य भी भारत की बातों को गंभीरता से सुनते हैं और फिर उसे जलवायु परिवर्तन, विकास लक्ष्यों, सबको सस्ती वैक्सीन की उपलब्धता, गरीबी उन्मूलन, आर्थिक रिकवरी, महिला सशक्तीकरण, आतंकवाद के खिलाफ जंग, शांति मिशन, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार आदि जैसे मुद्दों पर आगे बढ़ते हैं।

चीन भी होगा बेचैन

पीएम के दौरे पर चीन की पैनी नजर होगी। हिंद प्रशांत क्षेत्र में उसकी हरकतों पर अंकुश लगाने और शक्ति संतुलन स्थापित करने के लिए बने क्वाड देशों के सदस्यों की पहली बार व्यक्तिगत रूप से बैठक होनी है। चीन इस समूह को अपने लिए चुनौती मान रहा है। 24 सितंबर, शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन प्रधानमंत्री मोदी, जापान के पीएम सुगा और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के साथ व्हाइट हाउस में पहली बार व्यक्तिगत रूप से क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे।

इस बार पीएम मोदी का अमेरिका दौरा आने वाली दुनिया कैसी होगी इस पर भी बहुत कुछ फोकस करेगा। वैसे भी पीएम मोदी ने पिछले साल ही संयुक्त राष्ट्र के मंच से संयुक्त राष्ट्र को आगाह किया था कि अगर समय के साथ वो नहीं बदला तो स्थिति विषम हो सकती है और तालिबान के तौर पर ऐसा देखा जा रहा है। ऐसे मे पीएम मोदी का भाषण इस बार बहुत अहम हो जाता है।