दुनिया कोरोना वैक्सीन बनाने के बिलकुल करीब पहुंचा

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कोरोना महामारी से पिछले 6 महीनो से ज्यादा वक्त से दुनिया संघर्ष कर रही है। इस महामारी ने दुनिया की आर्थिक, समाजिक के साथ-साथ भौतिक ग्रोथ भी रोक रखी है। आलम ये है कि अभी भी लोग घरो में कैद हैं और इतंजार ये कर रहे हैं कि इस माहामारी से आखिर कम छुटकारा मिलेगा और इशकी वैक्सीन कब तक दुनिया के सामने पहुंच सकेगी। भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और चीन समेत कई देश कोरोना की वैक्सीन बनाने में लगे हुए हैं, लेकिन यह अभी तक बाजार में उपलब्ध नहीं हो सका है। हालांकि कुछ देशों के वैक्सीन लगभग तैयार हैं यानी वो ट्रायल के अंतिम चरण में हैं। इन टीकों के पहले और दूसरे चरण के ट्रायल में उत्साहजनक सफलता मिलने के बाद ही वैज्ञानिक यह दावा करने में लगे हुए हैं कि कोरोना वायरस की वैक्सीन जल्द ही लोगों तक पहुंच जाएगी। आइए जानते हैं उन तीन वैक्सीन के बारे में, जिनको लेकर कहा जा रहा है कि ये दमदार हैं और तैयार हो चुके हैं। साथ ही यह भी जानते हैं कि ये वैक्सीन कब तक बाजार में उपलब्ध हो जाएंगे?

ब्रिटेन

ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड युनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका कंपनी ने कोरोना वैक्सीन को लगभग तैयार कर लिया है, जिसे ‘एस्ट्राजेनेका वैक्सीन’ के नाम से जाना जा रहा है। इस वैक्सीन का पहले और दूसरे चरण में इंसानों पर सफल परीक्षण हो चुका है। अब सिर्फ तीसरे यानी अंतिम चरण का ट्रायल बचा है। माना जा रहा है कि यह भी जल्द ही पूरा हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने अंतिम चरण का ट्रायल दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में करने का फैसला किया है, क्योंकि यहां संक्रमितों की संख्या ज्यादा है और लगातार बढ़ती जा रही है।

चीन

चीन की दवा कंपनी सिनोवैक बायोटेक भी कोरोना की वैक्सीन तैयार करने के बेहद करीब है। उसने दुनिया के कई देशों में अपने वैक्सीन का सफल परीक्षण कर लिया है। कंपनी ने तो अब अपने तीसरे यानी अंतिम चरण का ट्रायल भी ब्राजील और बांग्लादेश में शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि बहुत जल्द यह वैक्सीन बाजार में उपलब्ध हो जाएगी।

ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया  की मेलबर्न युनिवर्सिटी भी कोरोना की वैक्सीन तैयार करने में जुटी हुई है। दावा किया जा रहा है कि यहां के वैज्ञानिकों ने लगभग 100 साल पुरानी टीबी की एक दवा से कोरोना की वैक्सीन तैयार कर ली है। हालांकि यह वैक्सीन कोरोना वायरस से सीधे लड़ने में सक्षम नहीं है, लेकिन इसकी मदद से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने में मदद मिली है, जिससे कोरोना वायरस को खत्म करना आसान हो गया है। इस वैक्सीन के दो चरणों के ट्रायल पूरे हो चुके हैं और अब तीसरे यानी अंतिम चरण का ट्रायल चल रहा है।

भारत

भारत में भी वैक्सीन तैयार हो रही वैक्सीन को लेकर अच्छी ही खबर आ रही है। कयास लगाया जा रहा है कि भारत में भी जो परिक्षण किये जा रहे हैं उसके नतीजे बेहद उत्साह वाले हैं और कयास लगाया जा रहा है कि भारत भी साल के अंत तक वैक्सीन बना लेगा। वैसे अब भारत द्वारा तैयार की गई वैक्सीन का मानव में परीक्षण एम्स में होने लगा है। जिसके नतीजे भी सकरात्म आ रहे हैं। ऐसे में ये कहा जाये कि भारत भी दुनिया को वैक्सीन दे सकता है तो गलत न होगा।

वैसे तो वैक्सीन के तीसरे यानी अंतिम चरण के ट्रायल में 1-4 साल तक का समय लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों की मानें तो सभी वैक्सीन के ट्रायल फास्ट ट्रैक मोड में है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि सितंबर-अक्तूबर या फिर इस साल के अंत तक वैक्सीन बाजारों में उपलब्ध हो सकती है।


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