विश्व आज भारत को गले लगाने के लिए बेकरार है

मोदी जी की कूटनीति के चलते एशिया में एक मजबूत दोस्ताना रिश्ता कुछ देशों के बीच बनता हुआ दिखाई दे रहा है जो एशिया के कुछ देशों को फूटी आंख नही सुहा रहा होगा। इन सबके बीच, ड्रैगन को साफ संदेश देने के लिए भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्‍ट्रेलिया की नौसेनाएं एक साथ जुटेंगी। अगले महीने मालाबार अभ्‍यास में इन चारों देशों की मौजूदगी चीन को रत्‍ती भर नहीं भाएगी।

चीन के खिलाफ खास चौकड़ी

एशिया में चीन के खिलाफ एक चौकड़ी बनाने में भारत कामयाब रहा है। भारत की ये एक बड़ी कूटनीतिक जीत भी है जिसका असर ये होगा कि इस इलाके में अब चीन अलग थलग पड़ गया है। जिसकी शुरूआत ऑस्‍ट्रेलियाई नौसेना की  मालाबार युद्धाभ्‍यास में हिस्‍सा लेने से होगी। नवंबर में होने वाले इस युद्धाभ्‍यास में अब कुल चार देश भारत, ऑस्‍ट्रेलिया, अमेरिका और जापान होंगे। जिन्‍हें ‘क्‍वाड’ भी कहते हैं। साल 2017 में इस जुड़ाव की दोबारा शुरुआत होने के साथ ही, मालाबार अभ्‍यास में तीन देश भारत, अमेरिका और जापान शामिल होते रहे हैं।

चीन की वजह से पास आए क्‍वाड देश

BECA को लेकर तेजी और क्‍वाड देशों का एक साथ आना सीधे तौर पर चीन को संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पिछले हफ्ते विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को ‘अहम सुरक्षा चुनौती’ करार दिया था। भारत ने क्‍वाड में शामिल हर देश के साथ ‘लॉजिस्टिक्‍स एक्‍सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट’ साइन कर रखा है। इससे उसे इन देशों के मिलिट्री बेसेज से संसाधन हासिल होते हैं। क्‍वाड देशों के रिश्‍तों में चीन की वजह से और निकटता देखने को मिली है। खासतौर से दक्षिण चीन सागर में जिस तरह ड्रैगन ने कब्‍जा बढ़ाना चाहा, उससे कई देशों को दिक्‍कत है।

आस्ट्रेलिया ने चीन की चेतावनी को किया दरकिनार

मालाबार अभ्‍यास में शामिल होने को लेकर चीन ने कई बार इशारो इशारो में आस्ट्रेलिया को चेतावनी दी थी लेकिन आस्ट्रेलिया ने चीन की चेतावनी को दरकिनार करते हुए अभ्यास में शामिल होने के न्योते को कबूल कर लिया है जिससे चीन की हेकड़ी और निकल गई है। गौरतलब है कि इससे पहले चीन की विस्तारवादी सोच के चलते आस्ट्रेलिया के करीब भी समंदर में चीन के जहाज देखे गये थे जिसके बाद आस्ट्रेलिया ने चीन को दो टूक शब्दो में समझा दिया था लेकिन अब आस्ट्रेलिया ने साफ कर दिया है कि वो चीन को सीधे जवाब देगा इसके लिये वो भारत के साथ खड़ा हुआ है। वैसे भी भारत के पीएम मोदी और आस्ट्रेलिया के पीएम की दोश्ती जग जाहिर है। दोनो के रिश्तों के चलते ही भारत और आस्ट्रेलिया का एक मजबूत रिश्ता बनता जा रहा है जिसकी पहली सीढ़ी ये अभ्यास बनेगा।

विश्व में धीरे धीरे देश चीन से कन्नी काटने में लगे है ये इसका सीधा सा एक प्रमाण भी है। लेकिन ऐसा सिर्फ कोरोना के चलते हो पा रहा है ये कहना ठीक नही होगा। क्योकि मोदी जी ने जिस तरह से पाक का असल चेहर विश्व को दिखाया वैसे ही अब चीन की कलई भी विश्व के सामने खोलने में सफल हो रहे है जिसका नतीजा है कि चीन से दुनिया का रिश्ता कटता जा रहा है।