निर्मला नही है ‘निर्बला’ ये बात विश्व ने भी माना

The world also accepted that Nirmala is not 'Nirbala'

जिस महिला को अबला बताया जा रहा था,जिस महिला को निर्बला का तमगा दिया जा रहा था आज उस महिला का लोहा समूचा विश्व मान रहा है। वो महिला ब्रिटेन की क्वीन एलिजाबेथ और ट्रंप की बेटी से ज्यादा पावरफुल मानी जा रही है। जी हा हम बात कर रहे है निर्मला सीतारमण यानी देश की वित्तमंत्री की जिसे फोर्ब्स पत्रिका ने 100 पावरफुल महिलाओं की लिस्ट में 34 वां स्थान दिया है।

निर्मला सीतारमण का आरंभिक जीवन- निर्मला सीतारमण का जन्म 18 अगस्त 1959 में तमिलनाडु के मदुरई में ब्राम्हण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री नारायण सीतारमण और माता का नाम सावित्री देवी है। इन्हें बचपन से ही देश की राजनैतिक व्यवस्था को समझने की ललक थी। इन्होने तिरुचिरापल्ली के सीतालक्ष्मी कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की। इसके बाद इन्होने जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से वर्ष 1980 में इकोनॉमिक्स में एमए की डिग्री हासिल की। इसके बाद इन्होने यहीं से एमफील की डिग्री भी हासिल की।

निर्मला सीतारमण का राजनैतिक करियर –निर्मला सीतारमण वर्ष 2006 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुईं।निर्मला सीतारमण भारतीय राजनीति की एक परिचित नाम है। यह दक्षिण पंथी विचारधारा की नेत्री हैं और एक लम्बे समय से भारतीय जनता पार्टी में के अंतर्गत कार्य कर रही हैं। 2014 के लोकसभा में राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन के जीतने के बाद इन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कैबिनेट में स्थान दिया।

जबकि मोदी 2.0 में इन्हे वित्तमंत्री की जिम्मेदारी दी गई। निर्मला सीतारमण की दूरदर्शिता ही है कि देश विश्व में मंदी के दौर में भी देश की आर्थिक स्थिति उतनी खराब नही है जितनी दूसरे देशों की देखी जा रही है। बल्कि निर्मला सीतारमण के फैसलों का असर है कि देश में विदेशी निवेश बढ़ रहा है। तो विदेशी कंपनिया भारत में बिजनेस बढ़ाने पर जोर दे रही है।

वित्तमंत्री की यही मेहनत है, कि आज विश्व की नामचीन पत्रिका ने उन्हे अपनी सूची में 34 वां स्थान दिया। इतना ही नही निर्मला सीतारमण के सियासी वार भी कुछ कम नही होते है। जब वो पार्टी की प्रवक्ता थी तो विपक्ष को ऐसा करारा जवाब देती थी कि विपक्ष उसका तोड़ नही निकाल पाते थे।

ऐसी कई प्रतिभा की धनी निर्मला सीतारमण को आज मोदी जी खुलकर काम करने दे रहे है। जिसका असर है कि देश आर्थिक तौर पर मजबूत हो रहा है। ऐसे में हम तो यही कहेंगे कि जो लोग बेटियों के पैदा होने को अभिशाप समझते है निर्मला सीतारमण ऐसी महिला उनके लिये जोरदार तमाचा है। और उनके लिये एक सीख भी है जो महिलाओं को कमजोर समझते है।