जिस तरह से पीएम मोदी ने बदली बनारस की काया वो नये जन प्रतिनिधियों के सामने बन गई है एक मिसाल

अगर अटल जी को राजनीति की प्रयोगशाला बोला जाता था तो पीएम मोदी उसी प्रयोगशाला के टीचर हैं। जिनसे आज के जन प्रतिनिधि बहुत सीख सकते हैं। वो ये जान सकते हैं कि अपने इलाके में विकास के काम कैसे किया जा सकते हैं। क्योंकि पिछले 7 साल में जिस तरह से मोदी जी ने अपनी संसदीय सीट बनारस का कायाकल्प किया है शायद ही किसी जनप्रतिनिधी ने इस तरह काम किया हो। आज बनारास में विश्व स्तर की सड़क व्यवस्था है तो अस्पताल व अंतरराष्ट्रीय स्तर के कन्वेंशन सेंटर के साथ साथ हर वो सुविधा मौजूद है जिसको हासिल करने के लिये जनता जनप्रतिनिधियों के द्वारे द्वारे भटकती रहती है।

27 बार अपने लोकसभा क्षेत्र का मोदी जी ने किया दौरा

ऐसा नहीं है कि पीएम मोदी के लिए अपने लोकसभा क्षेत्र में आना कोई असामान्य घटना रही हो, जैसा स्तवंत्र भारत के इतिहास में प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने वाले ज्यादातर प्रधानमंत्रियों के साथ रही है। पीएम मोदी पिछले सात सालों में 27 बार  वाराणसी का दौरा कर चुके हैं। यानी साल में चार बार का औसत, जबकि कई प्रधानमंत्री तो साल में एक बार भी अपने लोकसभा क्षेत्र का दौरा नहीं करते थे। अगर पिछले सवा साल से कोरोना की महामारी ने देश और दुनिया को अपनी जकड़ में नहीं लिया होता, तो मोदी के अपने लोकसभा क्षेत्र के दौरे का आंकड़ा शायद तीस के उपर होता। कोरोना की महामारी के सामने देश की लड़ाई की अगुआई करने वाले पीएम मोदी आठ महीने के अंतराल के बाद आज अपने लोकसभा क्षेत्र में पहुंचे थे, ताकि कोरोना की लहर के बीच उनके दौरे के चक्कर में पहले कोई गड़बड़ी न हो जाए और कोरोना के सामने लड़ाई कमजोर न पड़े। जब हालात सामान्य की तरफ बढ़े हैं, तब मोदी ने फैसला किया अपने क्षेत्र में जाने का।

लगातार अपने संसदीय इलाके का लेते रहते हैं जायजा

जब से पीएम मोदी बनारास से लोकसभा सांसद चुने गये हैं तब से ही वो बनारस में चल रहे कामकाज का हर दिन जायजा लेते हैं। जानकारों की माने तो पीएम मोदी कोई भी दिन ऐसा नहीं बीतता, जब अपने लोकसभा क्षेत्र के लोगों से मोदी किसी न किसी संदर्भ में बात नहीं करते हों, जो शायद ही सार्वजनिक तौर पर किसी के ध्यान में आता है। चाहे विकास कार्यों के बारे में कोई समीक्षा करनी हो या फिर कोई खुशी और गम का मौका हो, मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी अति व्यस्त दिनचर्या के बावजूद अपने लोकसभा क्षेत्र के विकास की चिंता और यहां के लोगों से जुड़े रहने का मौका निकाल ही लेते हैं। इतना ही नही कोरोना काल में ये और भी ज्यादा देखा गया। पिछले आठ महीने के दौरान उनका अपने क्षेत्र से कोई संपर्क नहीं रहा हो। कोरोना काल में कई बार उनको वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये वाराणसी के हालात की समीक्षा करते देखा गया। अस्पताल में बेड की चिंता करने से लेकर टीकाकरण और ऑक्सीजन की व्यवस्था अपने क्षेत्र के मतदाताओं के लिए करते नजर आए मोदी, अधिकारियों को इसके लिए निर्देश दिये। लेकिन ऐसा नहीं है कि सिर्फ अपने दौरों या फिर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये ही अपने लोगों की चिंता करते हैं।

सात साल में बदल गई है वाराणसी की तस्वीर

पिछले 7 सालों में बनारस की तस्वीर विश्व के पटल पर एक विकसीत शहर के तौर पर हो रही है जहां स्मार्ट शहर की हर खूबी मौजूद हो रही है। वरना पहले वाराणसी रांड, सांढ, सीढ़ी और संन्यासी के तौर पर जाना जाता था। दुनिया के प्राचीनतम जीवंत शहर के तौर पर पहचान रखने वाली काशी की सड़कें और गलियां पतली, चारों तरफ गंदगी का अंबार, माथे के उपर खतरनाक ढंग से लटकते बिजली के तार, बदबू और कूड़े से भरे यहां के घाट और गंगा में बहता नालों का पानी, यही पहचान थी जो आज बदल गई है। आज बनारस के घाट हो या सड़क या फिर बिजली के तार सभी बदल चुके हैं। बनारस में आज 10300 करोड़ रूपये की परियोजना पूरी हो चुकी है तो 10284 करोड़ की योजनाओं पर काम चल रहा है। अगर पूरी योजनाओं की बात करे तो बनारास में पिछले 7 सालो में 20,584 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात दे चुके हैं और ऐसा नहीं कि बस योजनाओं की शुरूआत करके पीएम मोदी शांत हो जाते हैं वो योजना जल्द से जल्द पूरी हो इसका भी ध्यान रखते हैं। तभी आज बनारस शिक्षा और स्वास्थ सेक्टर का हब बन गया है। तो व्यवसाय के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बनारास अब स्मार्ट सिटी बन चुका है और ये सब हुआ है पीएम मोदी की कड़ी मेहनत के जरिये। तो मोदी ने ऐसा कर उन सांसदों, विधायकों और अन्य जन प्रतिनिधियों को झकझोरने का काम किया है, जो चुने तो जाते हैं, लेकिन अपनी जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरते।

 

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