देश में तैयार हुई वैक्सीन को मिली हरी झंडी, विश्व ने भारत का माना लोहा

आखिरकार वो पल आ ही गया जब देश को पता ही चल गया कि आखिर देशवासी कोरोना के खिलाफ कौन सी वैक्सीन खरीद सकते है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भारत कोरोना वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे दी। कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को इस्तेमाल की अनुमति मिलने का आधिकारिक ऐलान किया जिसके बाद विश्व एक बार फिर से भारत का लोहा मान रहा है।

एक साथ 2 वैक्सीन को मंजूरी देने वाला पहला देश

डीसीजीआईके इस फैसले के साथ ही भारत दुनिया का पहला देश बन गया, जिसने एक साथ दो कोरोना वैक्सीनको मंजूरी दी है। दोनों ही वैक्सीन को 2 से 8 डिग्री तापमान के बीच स्टोर करना होगा। सरकार की माने तो ये 110 प्रतिशत सुरक्षित हैं। करीब एक साल तक कोरोना वायरस से जंग के बीच भारत को आपात इस्तेमाल के लिए 2 वैक्सीन मिल गई है। कोविशील्ड और कोवैक्सीन नाम की वैक्सीन लोगों तक किस तरह से पहुंचेगी। इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है।सबसे पहले वैक्सीन पाने वालों में डॉक्टर, नर्स, हेल्थ वर्कर्स या फ्रंटलाइन वर्कर्स शामिल होंगे। बता दें कि कोवैक्स पूरी तरह से स्वदेशी है और इसे भारत बायोटेक ने बनाया है। ये वैक्सीन हैदराबाद लैब में तैयार की गई है। वहीं कोविशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका ने मिलकर बनाया है। भारत में इसका निर्माण और ट्रायल के लिए सीरम इंस्टिट्यूट भागीदार है।

नमो ने देश के वैज्ञानिक को दिया शुभकामनाएं

वैक्सीन के ऐलान के तुरंत बाद पीएम मोदी ने वैक्सीन बनाने वाले देश के वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं दी और बोला कि आत्मिर्भर भारत के लिये ये एक बहुत शुभ संकेत है कि देस में बनी वैक्सीन का सफल परीक्षण होने के बाद अब इसे देश के लोगों के लए उपलब्ध करवाया जायेगा ताकि इस वायरस को हराया जा सके। इस बाबत पीएम ने ये भी साफ किया कि सरकार ने कैसे इस वैक्सीन को आम लोगों तक पहुंचाया जायेगा इसका रोडमैप तैयार कर लिया है जिसका ट्रायल भी कर दिया गया है। लेकिन जिस तरह से हमारे वैज्ञानिकों ने रात दिन एक करके बिनारुके बिना थके ये उपलब्धि पाई है वो बहुत बड़ी कामयाबी है। बस इस तरह का जोश कायम रख कर हमें काम करते रहना चाहिये।

दूसरी तरफ मेक इन इंडिया वैक्सीन के आने की खुशी देश की शेयर बाजार ने भी मनाई जिसके चलते शेयर बाजार 48 हजार के ऊपर पहुंच गया जो अपने आप में एक रिकार्ड है। मतलब ये साफ है कि वैज्ञानिकों की इस उपलब्धियों से देश में खुशी का माहौल है। बस पेट में दर्द उन्हे हो रहा है जो कोरोना को भी सियासी मुद्दा बनाकर रोटिया सेक रहे थे।