देश को इटली बनाने की चाल

समूचे विश्व में भारत ही ऐसा देश है, जो कोरोना के खिलाफ जंग में शुरू से ही जीत रहा है और इसकी वजह सटीक समय पर सटीक रणनीति है, जो खुद पीएम मोदी ने तैयार की है। जिसका असर ये हुआ, कि पीएम मोदी की जय जयकार समूचे विश्व में हो रही है और ये बात कुछ लोगो की आंखो में खटक रही है। जिससे वो कोरोना को बढ़ाने  में जुट गये है।

 

मजदूरों, कामगारों के सहारे कोरोना को बढ़ाने की सियासत

पीएम मोदी ने लॉकडाउन लगाकर देश के हजारों लोगो की जान और जहान को बचाया। हां इसमे कोई दो राय नही है, कि लॉकडाउन का असर लाखों की संख्या में कामगारों और मजदूरो पर पड़ा है, लेकिन इनकी सहायता के लिये सरकार ने कई तरह के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया, तो दूसरी तरफ ट्रेन के जरिये घर जाने की व्यवस्था भी की लेकिन कुछ को लग रहा है,आखिर संकट के वक्त देश में सब कुछ अच्छा अच्छा कैसे हो रहा है। ऐसे में मोदी विरोधी फ्री का ऐलान करके अपनी मरी हुई सियासत चमकाना चाहते है और इसके लिये वो मजदूर कामगारो के जीवन से भी खेलना चाहते है।  उन्हे ये नही पता कि अगर उनके इस एक बयान के चलते सभी मजदूर रेलवे स्टेशन पहुंच गये, तो क्या हाल होगा स्टेशन का इससे समाजिक दूरी की सोच पर भी प्रभाव पड़ेगा जिससे कोरोना संक्रमण तेजी के साथ देश में फैलेगा शायद यही वो चाहती है कि देश में तेजी से कोरोना फैले जिससे वो इसपर सियासत कर सके।

 

देश को भड़काने का काम

वैसे मोदी विरोधी ये काम पहले भी कर चुके है जिससे देश में तनाव का माहौल पिछले कुछ दिन से देखा जा रहा था। जनता को भड़काकर धरना करवाना फिर तोड़फोड़ करवाकर जोर जोर से सरकार के खिलाफ गला फाड़ना कुछ लोगो की आदत बन गई है। ये सब जानते है। लेकिन अब इनके निशाने में गरीब मजदूर और कामगार है जिनको भड़काकर ये देश का माहौल ही नही खराब करना चाहते बल्कि देश को महामारी की ओर ले जाना चाहते है। तभी तो जब समूचा विश्व कोरोना के खिलाफ समाजिक दूरी को बढ़ा हथियार बता रही है तो वो इसपर सवाल खड़ा कर रहे है। तो कभी लॉकडाउन पर और हां जिस एप की दुनिया आज दिवानी हो गई है, उस आरोग्य सेतु एप का विरोध भी खुलकर किया जा रहा है और लोगो को भड़काया जा रहा है ।यहां तक उस रेलवे को भी बदनाम करने के लिये झूठ बोला जा रहा है, जो लॉकडाउन के शुरू होते ही हर तरह की मदद आम लोगो तक पहुंचा रहा है। किसी को खाने खिलाकर तो किसी को रहने के जगह देकर तो किसी को मेडिकल सामान पहुंचाकर,  ऐसे रेलवे विभाग पर आरोप लगाया जा रहा है कि वो मजदूरों से घर वापसी पर किराया ले रहा है, जो पूरी तरह से गलत है रेलवे 85 फीसदी पैसा खुद खर्च करके इन लोगो को घर पहुंचा रहा है तो सिर्फ 15 फीसदी पैसा राज्यों से मांग रहा है।

 

कुलमिलाकर कोरोना काल में ये भी स्पष्ट हो गया है कि कौन अपना है और कौन पराया कौन देशवासियों के लिये जीता है और कौन सिर्फ देशवासियों को मोहरा बनाकर अपने लिये जीता है। ऐसे में दोस्तो हमे देश को इटली नही बनाना है। हमे मोदी जी के साथ मिलकर एक बार फिर दिखाना है, कि  कोरोना को तो हम  हरायेंगे ही साथ में देश के दुश्मनो के मंसूबो को भी पस्त करेंगे।