घाटी से आतंकियों काउंटडाउन शुरू हो गया, सेना ने 6 महीने में ढ़ेर किये 101 आतंकी 

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

देश का सिर कहे जाने वाले जम्मू कश्मीर में अब सेना ने ठान लिया है कि सीमापार से जो भी आतंकी भीतर आएंगे वो मारे जाएंगे। इसिलिये तो कश्मीर में जो आतंकी आ जाता है वो मौत के घाट उतार दिया जाता है और ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि मोदी सरकार ने सेना को खुली छूट दे रखी है कि वो देश के दुश्मनों के साथ किसी तरह की रहम न दिखाये।

बैकफुट में कश्मीर में आतंकी

कश्मीर भारत का मस्तक एक वक्त आतंकियों के बम और गोलियो की आवाज से आम लोगों के लिए जहान्नुम बन गया था लेकिन आज वही कश्मीर की तस्वीर बदली-बदली नजर आ रही है। क्योंकि सेना अब इन आतंकिययों के साथ कोई मुरौवत नही कर रही है तभी तो 6 महीने में 101 आतंकियों को फौज ने 72 हूरों से मिलाया दिया है। तो पिछले 2 हफ्ते में 22 आतंकियों को ठिकाने लगाया गया है। इसी तरह आतंक का नाश करने के लिये बीते 24 घंटे में फौज ने 9 आतंकियो को मार के अपना रुख साफ कर दिया है कि सेना अब घाटी में आतंक की कमर ही नही तोड़ेगी बल्कि आतंक को खत्म करके ही दम लेगी।  खुद आतंकियों के पाक में बैठे आका भी ये बात मान रहे हैं कि आजकल फौज को मोदी सरकार ने बहुत छूट दे रखी है जिसके चलते वो घाटी में आंतकियों पर भारी पड़ रहे हैं। इसके साथ-साथ धारा 370 खत्म करने का भी असर जम्मू कश्मीर में देखा जा रहा है। वहीं सरकार की कूटनीति का हिस्सा बने POK को लेकर मोदी सरकार का दबाव का ही असर है कि आज पाक कश्मीर की जगह POK के मुद्दे पर ज्यादा फंसा हुआ है। ऐसे में आतंकी मंसूबों पर घाटी में ब्रेक लगता हुआ दिख रहा है।

घाटी के लोग भी कर रहे हैं आतंक को बाय-बाय

आतंकियों को लेकर फौज को मिल रही सफलता का सबसे बड़ा कारण ये है कि आज घाटी के लोग आतंकियो की और पाक की चाल को समझ गये हैं मोदी सरकार की तरफ से मिल रही मदद के चलते विकास से जुड़ रहे हैं तभी फौज में कश्मीर के हजारों युवा आज भर्ती होने के लिए आ रहे हैं तो महिलाओं में भी सुरक्षा बलों में भर्ती होने का जोश दिख रहा है। फौज की माने तो घाटी में आतंकी समूहों में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या में कमी आ रही है। यह इस बात का प्रतीक है कि कश्मीर के लोगों ने अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को सकारात्मक भाव से लिया है। यह उन ताकतों के लिए भी जवाब है‚ जो इस अनुच्छेद को बनाए रखने के पक्ष में थे। ऐसे में यह कश्मीर स्थित आतंकियों के लिए शुभ संकेत नहीं है‚ क्योंकि कैडर के अभाव में वे अपनी आतंकी गतिविधियों को अपेक्षा के अनुरूप नहीं चला सकते।

हालांकि इतने में अभी ये कह देना जल्दबाजी होगा कि कश्मीर से आतंक का खात्मा हो गया है क्योंकि पाकिस्तान ऐसा होने नही दे रहा है। लेकिन ये तय है कि दुनिया की जन्नत कहलाने वाले कश्मीर से राक्षस की संख्या जरूर कम हो रही है। जिसका नतीजा ये निकल रहा है कि जम्मू और कश्मीर आज विकास से जुड़ रहे है। वहां के बच्चे भी अपने बेहतर कल के सपने देख रहे हैं। क्योंकि उन्हे पता चल गया है कि कौन उनका अपना है और कौन उन्हें अपनो से लड़ा रहा है।


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •