सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग प्रदर्शन को बताया गलत

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शाहीन बाग में CAA को लेकर बैठे धरने को देश के सुप्रीम कोर्ट ने भी गलत बताया है। कोर्ट ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि जिस तरह से आम लोगो को दिक्कत पहुंचाकर धरना दिया जा रहा है वो गलत है।

एक बार फिर ये साबित हो गया है कि शाहीन बाग में 50 दिन से ज्यादा से बैठे प्रदर्शनकारी सिर्फ हटधर्मिता कर रहे है और कुछ लोग सिर्फ अपना सियासी उल्लू सिध्द करने के लिये उनका इस्तेमाल। ये बात हम इस लिये बोल रहे है, क्योकि देश की सबसे बड़ी अदालत ने भी इस बात पर मोहर लगाते हुए कहा है कि ये धरना पूरी तरह से संविधान के अनकूल नही है।

हर जगह प्रदर्शन ठीक नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रदर्शन के दौरान एक मासूम बच्चे की मौत पर कड़ा ऐतराज जताया है। कोर्ट ने प्रदर्शनकारी महिलाओं द्वारा बच्चों के प्रदर्शन के अधिकार की दुहाई देने पर फटकार भी लगाई और कहा कि 4 महीने का बच्चा कैसे प्रदर्शन कर सकता है? सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि 4 महीने के बच्चे की मौत हुई। CJI ने कहा कि हम इस समय एनआरसी, एनपीआर या किसी बच्चे को पाकिस्तानी कहा गया इस बाबत सुनवाई नहीं कर रहे है। हमें मदरहूड का सम्मान है, हम किसी की आवाज नही दबा रहे हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट में इस पर बेवजह की बहस नही करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप कभी भी इतने लंबे समय तक रास्ता रोककर बैठ जाएं, यह सही नहीं है। आपको प्रदर्शन करने के लिए कोई अलग जगह चुन लें। हालांकि कोर्ट ने आज इन प्रदर्शनकारियों को हटाने का कोई आदेश नहीं दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सभी पक्षों को सुना जाना जरूरी है। आज कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। लेकिन कोर्ट के फैसले से ये साफ संकेत मिलते है कि आप अगर इस तरह से हजारों लोगो को दिक्कत पहुंचाकर धरना करते है तो वो ठीक नही है। ऐसे में अब शाहीन बाग में बैठे उन लोगो को इस फैसले पर विचार जरूर करना चाहिये और उन लोगो को भी जवाब देना चाहिये जो सियासत के चलते इन मासूम लोगो का इस्तेमाल कर रहे है।

 


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