बेकार पड़े केले के तनों से आत्मनिर्भर बनने की कुछ महिलाओं की कहानी- ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने किया जिक्र

कुछ लोग “मन की बात” पर तंज कसते हुए ये कहते है कि पीएम इसमें सिर्फ बेकार की बाते करते है जबकि पीएम मोदी के इस शो से एक तरफ हम भारत से जुड़ते है तो दूसरी तरफ कई ऐसी बाते सामने आती है जिसके जरिये हमें बहुत सीखने को मिलता है। मसलन अब इस बार के मन की बात (MannKiBaat) में जब पीएम ने लखीमपुर जिले की कुछ महिलाओं के केले के बेकार तने से फाइबर बनने की बात बताई तो आप समझ सकते है कि इससे कितना फायदा हुआ होगा।

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बेकार पड़े केले के तनों से बनाया फाइबर

लखीमपुर जिले में केले के बेकार तनों से फाइबर बनाने के महिलाओं के प्रयास को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहा है। ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने लखीमपुर की महिलाओं की आत्मनिर्भरता की कोशिशों की चर्चा की। उन्होंने कहा “मुझे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किए गए एक प्रयास के बारे में भी पता चला है। कोविड के दौरान ही लखीमपुर खीरी में एक अनोखी पहल हुई है। वहां महिलाओं को केले के बेकार तनों से फाइबर बनाने का प्रशिक्षण देने का काम शुरू किया गया। केले के तने को काटकर मशीन की मदद से बनाना फाइबर तैयार किया जाता है, जो जूट या सन की तरह होता है। इस फाइबर से हैंडबैग, चटाई, दरी कितनी ही चीजें बनाई जाती हैं। इससे एक तो फसल के कचरे का इस्तेमाल शुरू हो गया, वहीं दूसरी तरफ गांव में रहने वाली हमारी बहनों-बेटियों को आय का एक और साधन मिल गया।

मिल रहा 50 फीसदी से अधिक का मुनाफा

बनाना फाइबर की बिक्री लगभग ₹150 से ₹200 पर किग्रा की दर से की जा रही है तथा इस मूल्य पर उसे लगभग 50 प्रतिशत मुनाफा प्राप्त हो रहा है। मांग बढ़ने से मुनाफा में भी वृद्धि की सम्भावना है। मां सरस्वती ग्राम संगठन/स्वयं सहायता समूह से जुड़ी कई महिलाएं पूनम देवी, राधा, सुनीता, रामवती इत्यादि के पास बनाना फाइवर उत्पदन से पूर्व न तो कोई संगठित डगर थी और न ही स्पष्ट मंजिल, लेकिन बनाना फाइवर उत्पादन से जुड़ने के बाद यह महिलाऐं प्रतिदिन औसतन 400 रुपये जुटा पाने में सक्षम हुयीं हैं। इससे इनका हौसला बढ़ा है, जिससे इस उत्पादन को और तीव्र करने के लिए तत्पर हैं। इस उत्पाद की सततता भी देखी जा सकती है।क्षेत्र की अन्य गरीब स्वयं समूह की महिलाओं को इस नवाचार अभियान से जोड़ा जा रहा है तथा गुजरात से अतिरिक्त मशीनरी मंगाने की तैयारी की जा रही है।

उत्पादन से बाजार तक सबके हैं इंतज़ाम

ऐसा नही है कि इसके लिए महिलाओं की मदद के लिए सरकार ने मदद नहीं कि बल्कि आगे आकर सरकार ने हर वो जरूरत सामान भी मोहइया करवाया। इसके लिये  इनको स्वयं सहायता समूह और ग्राम संगठन को सीएलएफ से ऋण मिला तथा विभिन्न विक्रेताओं से बात करने के बाद रिद्धि इंटरप्राइजेज सूरत, गुजरात से नवम्बर, 2020 में मशीनों को मंगवाया गया। मशीन आने से दिसम्बर, 2020 में उत्पादन तो शुरू हो गया, लेकिन अब चुनौती थी बाजार ढूंढने की। चूंकि बनाना फाइबर का उपयोग अधिकतर कागज व कपड़ा उद्योग में हो रहा है। अतः इसी क्रम में सूरत, अहमदाबाद, कानपुर इत्यादि क्षेत्रो में विक्रय हेतु सम्पर्क किया गया। इससे सार्थक परिणाम मिले तथा सर्वप्रथम अहमदाबाद, गुजरात की कम्पनी एल्टमट प्रा.लि. द्वारा ग्राम संगठन को टेस्टिंग हेतु 20 किग्रा बनाना फाइबर का आर्डर दिया गया। कम्पनी द्वारा टेस्टिंग में इसे उच्च गुणवत्ता का बताया गया तथा कम्पनी द्वारा ग्राम संगठन से प्रति माह 400 किग्रा बनाना फाइबर लेने की तैयारी की जा रही है, जिसकी शुरूआत अगस्त, 2021 में की जाएगी। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य कम्पनियों द्वारा बनाना फाइबर का क्रय करते हुए 21,000 टोकन मनी के रूप में दिया जा चुका है। यही नहीं, उत्पाद को बेचने के लिए इंडिया मार्ट पर भी पंजीकरण किया गया है। इंडिया मार्ट की विभिन्न कम्पनियों ने ग्राम संगठन को बडे पैमाने पर लगभग 10 टन मांग की है। बड़ी मात्रा में व्यवसायिक रूप से बनाना फाइबर की मांग की जा रही है। अतः उसके लिए ग्राम संगठन का जीएसटी पंजीकरण भी कराया जा रहा है।

अब आप ही बताये अगर ‘मन की बात’ कार्यक्रम नहीं होता तो क्या हम इस बारे में जान पाते जवाब है नहीं। इसलिये ये मान के चलिये कि पीएम के इस खास कार्यक्रम से हम बहुत कुछ नया करने की ओर बढ़ सकते है। वैसे भी इस शो को शुरू करने से पहले पीएम मोदी की सोच भी यही थी जो आज साकार हो रही है।