कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर कुछ सरकारों की सुस्त चाल

कोरोना का नया ओमीक्रोन वैरिंएट जहां एक ओर देश में कहर बरसाने के लिये बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ इससे आम लोगों की रक्षा के लिये केंद्र सरकार तेजी से काम करने में जुटी है लेकिन अफसोस तो तब होता है जब कुछ राज्य इसमें ढ़ीलाई बरतते हुए दिखाई दे रहे है वो भी बस इसलिये कि बाद में वो इस पर सियासत करके केंद्र सरकार को बदनाम कर सके।

ओमोक्रोन से निपटने के लिये केंद्र सरकार ने तेजी से बढ़ाया कदम

वैसे तो कोरोना को लेकर मोदी सरकार पिछले 2 साल से लगातार तेजी से काम कर रही है लेकिन जैसे ही ओमीक्रोन के रूप में नये कोरोना के मामले सामने आने लगे केंद्र सरकार ने कुछ विशेष ऐतियात कदम उटाये है जो इस प्रकार है।

  • अंतरराष्‍ट्रीय यात्रियों की आरटी-पीसीआर जांच अनिवार्य करने के निर्देश
  • विदेश से आने वाले संक्रमितों के नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग कराने का फैसला
  • जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तत्काल नमूने भेजने की सलाह
  • जोखिम वाले देशों से आने वालों की कड़ी निगरानी और संपर्कों का पता लगाने के निर्देश
  • एयरपोर्ट और बंदरगाहों पर अधिकारियों को सख्‍त कोविड जांच का अनुपाल करने के निर्देश

इतना ही नही इसके बावजूद पीएम मोदी ने स्वस्थ्य अधिकारियों के साथ खुद बैठक करी और जाना की कैसे काम किया जा रहा है। मंथन के बाद पीएम मोदी ने अधिकारियों को टेस्टिंग, ट्रैकिंग और ट्रीटमेंट पर जोर देने को बोला है।

गैर बीजेपी राज्यों में जारी है कोताही

दूसरी तरफ वो राज्य है जहां डबल इंजन की सरकार नहीं है वहां कोरोना के इंतजाम को लेकर कोताही साफ दिख रही है। ऐसी तमाम खबरे आ रही है जिसमे निकलकर आ रहा है कि सरकार का प्रबंधन ठीक से नही हो रहा है। बात सबसे पहले छत्तीसगढ़ की करते है जहां पीएम केयर्स फंड से दिये गये ऑक्सीजन प्लांट का मैटिनेस तक राज्य सरकार नही करवा रही है। तो झारखंड सरकार आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों को एक्सपायरी दवा की किट पकड़ा रही है। इसके साथ साथ खबर ये भी आई है कि दिल्ली, तेलंगाना, प बंगाल और तमिलनाडु सरकार ने तो पीएम केयर्स फंड से भेजे गये 20 फीसदी वैंटिलेटर तो अभी डब्बों में बंद हो कर धूल ही फांक रहे हैं जो इस तरह इसारा करता है कि सरकार का काम कितना ढीला है।

लेकिन इसके पीछे कही ना कही सियासत भी देखी जा रही है जिसके चलते ये साफ पता चला है कि दूसरी लहर की तरह पहले कोताही बरतो और फिर केंद्र पर सारा जिम्मा डालकर सियासत करो। लेकिन वो शायद ये भूल गये कि जनता एक बार उनके जाल में फंस सकती है, बार बार नहीं

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