बजट ड्यूटी के दौरान पिता की मौत के बावजूद नहीं छोड़ी बजट के ‘सीक्रेट छपाई का काम

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बजट 2020 के बीच एक ऐसी खबर आ रही है, जिसे कर्तव्यपरायणता के मिसाल के तौर पर दी जा सकती है। बजट की छपाई का काम कितना मुश्किल और जटिल होता है, इसको करने के लिए कितनी दृढ़ शक्ति की जरूरत होती है, इसका प्रमाण दिया डिप्टी मैनेजर (प्रेस) कुलदीप शर्मा ने। कुलदीप, बजट जैसे महत्वपूर्ण और गोपनीय काम में लगे हुए थे इसी दौरान बजट पेपर्स की छपाई की ड्यूटी में लगे वित्त विभाग के अधिकारी के पिता की मौत 26 जनवरी को हो गई। इसके बावजूद उन्होंने प्रेस एरिया नहीं छोड़ने का फैसला किया। इस दुख की घड़ी में भी उन्होंने काम के लिए परिवार और उनके दायित्व को पीछे छोड़ दिया।

बताया जा रहा है कि प्रेस के डिप्टी मैनेजर कुलदीप शर्मा के पिता का बजट ड्यूटी के दौरान 26 जनवरी को निधन हो गया, लेकिन शर्मा आखिरी बार उन्हें देख भी नहीं पाए। शर्मा बजट छपाई के दौरान तय नियमों को पालन करने की इच्छाशक्ति को जताते हुए अपने घर नहीं गए। उन्होंने कहा कि बजट की छपाई का काम पूरा होने के बाद ही वह घर जाएंगे। वित्त मंत्रालय ने शर्मा की कर्मठता और कर्तव्य निर्वहन की भावना को सलाम किया।

उन्होंने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘दुख के साथ सूचित कर रहा हूं कि श्री कुलदीप कुमार शर्मा, डिप्टी मैनेजर (मीडिया) के पिता का निधन 26 जनवरी 2020 को हो गया है। शर्मा फिलहाल बजट ड्यूटी पर हैं और दस दिनों के लिए नॉर्थ ब्लॉक के अंदर लॉक हैं। इतने बड़े नुकसान के बाद भी शर्मा ने तय किया है कि वो एक मिनट के लिए भी अपनी जिम्मेदारी नहीं छोड़ेंगे।’

गौरतलब है कि हलवा सेरेमनी के बाद बजट की छपाई नार्थ ब्लॉक में होती है। छपाई कार्य में लगे कर्मचारी तब तक बाहर नहीं आते, जब तक कि बजट भाषण पूरा नहीं हो जाता। दरअसल दस दिनों तक बजट की प्रिंटिंग का काम होता है। इस दौरान गोपनीयता बरकरार रखने के लिए सभी संबंधित कर्मचारियों को बाहर नहीं निकलने दिया जाता है।

इस तरह की विशेष परिस्थिति में ही उन्हें बाहर निकलने की इजाजत होती है। लेकिन कुलदीप कुमार शर्मा ने अपने काम की गंभीरता को समझते हुए बजट की गोपनीयता बरकरार रखने के लिए अपने पिता की अंत्येष्टि में नहीं जाने का फैसला किया।

बता दे कि वर्ष 1980 से नार्थ ब्लाक के बेसमेंट में बजट छापने का काम किया जा रहा है। बजट तैयार करने की प्रक्रिया बेहद जटिल और तनाव भरा होता है। इस दौरान चौबीसों घंटे इन कर्मचारियों को वित्त मंत्रालय के भीतर ही रहना होता है। उन्हें अगले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार द्वारा लिए जाने वाले सभी सरकारी फैसलों की जानकारी होती है। इसलिए सभी कर्मचारियों को हलवा रस्म के साथ कमरे में तब तक बंद रहना पड़ता है जब तक कि बजट लोगों के सामने न आ जाए।

क्यों किया जाता है कमरे में बंद

बजट छपाई के दौरान मसौदे की प्रिंटिंग होती है। इस दौरान उन्हें अगले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार द्वारा लिए जाने वाले सभी सरकारी फैसलों की जानकारी होती है। ऐसे में अगर वो किसी भी बाहरी व्यक्ति से संपर्क करेंगे, तो वो सरकार की नीतियों का फायदा उठा सकते हैं। यानी कि कर्मचारी, सरकारी जानकारी का अपने निजी हित के लिए फायदा उठा सकता है। इसलिए सभी कर्मचारियों को नॉर्थ ब्लॉक स्थित वित्त मंत्रालय में कमरे में तब तक बंद रहना पड़ता है जब तक कि बजट लोगों के सामने न आ जाए।

 


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