वैक्सीन पर अनावश्यक सियासत के पीछे का राज कुछ यूं है जनाब

कोरोना वैक्सीन को लेकर जहां हम सभी को अपने वैज्ञानिको पर गर्व करना चाहिये तो कुछ लोग ऐसे भी है जो इस पर अनावश्क टीका टिप्पणी करके सिर्फ मीडिया में अपने आपको दिखाना चाहते है। इतना ही नही कोरोना रोधी वैक्सीन यानी टीके पर तमाम अटकलों और विवादों के बीच उसके ‘हराम’ और ‘हलाल’ होने के सवालों ने महामारी के संकट को और गहरा कर दिया है। भारत में वैक्सीन पर सियासी दलों की सियासत को धार देने में मुस्लिम समाज के इस कंफ्यूजन ने अहम योगदान दिया है जो एक तरह से अपने वैज्ञानिको की काबलियत पर शक करना है।

कोरोना की वैक्सीन को लेकर असमंजस क्यो ?

आमतौर पर वैक्सीन में सूअर की चर्बी से बने जिलेटिन का इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन मौजूदा वैक्सीन में ‘पोर्क जिलेटिन’ के इस्तेमाल होने का कोई सुबूत नहीं है। कई वैक्सीन कंपनियों ने भी सूअर की चर्बी के इस्तेमाल की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग धर्म की आड़ में अपनी सियासत चमकाने की कोशिश में लगे है इतना ही नही देस में तो कुछ नेताओं ने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए इस वैक्सीन को एक पार्टी की वैक्सीन बोलकर बहिष्कार करने की बात तक कर दी है जिससे उनकी ओछी सियासत का पता चलत है। एक समुदाय को खुश कर अपनी सियासत में धार देने वाले ऐसे नेता तो देश के वैज्ञानिक पर भी सवाल उठाने से नही चूक रहे है। इससे पहले भी ये नेता देश की सेना, और कई खास महकमो पर निशाना साधकर सियासत को चमकाते हुए देखे गये है जो इनकी मानसिकता को दर्शाता है।

मोदी विरोध में देश विरोधी होती सियासत

मोदी जी के सत्ता में आने के बाद से ही देखा जा रहा है कि विपक्ष मोदी विरोध करते करते देस का विरोध करने लगे है। पिछले 6 साल में तमाम ऐसे आंदोलन देख गये है जब देशहित मे उठाये गये कदम को लेकर कुछ लोग देशविरोधी बयान देते हुए पाये गये है। सबसे पहले ऐसा मौका नोटबंदी के वक्त देखा गया इसके बाद सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त तो सरकार से कुछ लोगो ने ऐसे सवाल पूछे जिससे सेना पर सवाल उठाने लगे। इसी तरह सीएए और किसान आंदोलन के बाद वैक्सीन के मामले में भी देखा जा रहा है जब सिर्फ मोदी विरोध में वैक्सीन का विरोध किया जा रहा है। लेकिन ऐसा करने वालो को ये नही लग रहा है कि उनके इस बयान से देश कि छवि दुनिया में खराब हो रही है। लेकिन उन्हे क्या देश जाये चूल्ह में उन्हे तो उनकी रोटिया सिकना चाहिये बस यही सोच के चलते वो ऐसा काम करने में जुटे है।

लेकिन वो ये भूल गये कि देश में उन जैसी सोच रखने वालो की आबादी बहुत कम है और देशभक्त ज्यादा ऐसे में हम तो यही बोलेगे कि वो कुछ भी बोले कितना भी भ्रम फैलाये लेकिन हम तो वैक्सीन लगाकर ही रहेगे।