देशवासियों के सामने धीरे धीरे खुल रही किसान नेताओं की हकीकत

किसान आंदोलन को लेकर सरकार की कही हर बात धीरे धीरे सही साबित होती नजर आ रही है और ये साफ हो रहा है कि किसान आंदोलन  किसानों के हित के लिये नहीं बल्कि ये केवल कुछ लोगों को अपनी सियासत चमकाने और मीडिया में छाये रहने के लिये है। तभी तो किसान नेता अब दूसरी  पार्टियों की रैली में हिस्सा ले रहे है तो उनके आंदोलन में सियासी लोग सत्ता के विरोध में बयानबाजी करने में लगे हुए है। किसान एक तरफ सड़क पर धरना दे रहा है तो किसान नेता आंदोलन के चंदे के पैसे से होटलो में मजे से रुके हुए है।

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किसान नेता का खुल रही पोल

किसान आंदोलन के नाम पर 100 दिन से ज्यादा से दिल्ली सीमा पर धरना दे रहे किसान नेताओं की नेतागिरी अब दिखने लगी है। साफ दिख रहा है कि ये लोग सिर्फ अपनी सियासत चमकाने के लिये किसानों को आगे करके मचा लूट रहे है। कभी जोधपुर तो कभी नंदीग्राम पहुंचकर मोदी सरकार के खिलाफ बोलकर अपनी किस्मत चमकाने में लगे हुए है। ये नेता भी देश में नकरात्मकता का वही माहौल बना रहे है जैसे कुछ साल पहले हार्दिक पटेल, कन्हैया कुमार जैसे लोगों ने बनाया था लेकिन जैसे उनकी हकीकत जनता के सामने आई ठीक वैसे ही किसान नेताओं की भी हकीकत सामने आ रही है जो हर रोज किसानों को झूठ बोलकर सत्ता के खिलाफ माहौल बनाने में जुटे हुए है। लेकिन इन्हे ये नही पता कि इनका भूतकाल जनता अच्छी तरह से जानती है इस लिये उनके झूठ में फंसने वाली नहीं।

प्रदर्शन के नाम पर 3 सितारा होटल में किसान नेता ले रहे मजे

सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर के तीनों नेशनल हाइवे को बीते 100 दिनों से ज्यादा समय से किसान बिल का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने घेरा हुआ है। 100 दिनों से ज्यादा समय से चल रहे इस प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाइवे पर ही या तो टेंट लगाकर या फिर ट्रॉलियों पर मोटी चादर चढ़ाकर अपने रहने का इंतजाम किया हुआ है लेकिन इन्हे सरकार के खिलाफ मोर्चा संभालने की बात करने वाले इनके नेता खुद इनके साथ धोखेबाजी करने में जुटे है तभी तो ये लोग घरने स्थल की बजाये बढ़िया 3 सितारा होटल में मजे ले रहे है। इसका खुलासा एक निजी चैनल ने किया है। हालांकि किसान नेता इसे साजिश बता रहे है लेकिन कहावत है न कि धुंआ वही निकलता है जहां आग लगी होती है। यानी कही न कही तो ये नेता अपने फायदे में लगे हुए है तबी तो वो इस बिल के खिलाफ सरकार की बात मानने को तैयार नही हो रही है और नही बात करने को राजी हो रहे है जिससे पता चल रहा है कि वो इस मुद्दे को खत्म होना ही नही चाहते है।

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पर कुछ भी हो जनता सब समझ रही है और बस मौके का इतंजार करने में लगी है कि उसे एक मौका मिले जवाब देने के लिये। फिर देखना कैसे जनता देश में नकरात्मकता फैलाने वालों को कैसे जवाब देती है।