MSP पर हुई धान की फसल की खरीद दिखायेगी, कृषि बिल का विरोध करने वालों को आईना

एक तरफ किसान विरोधी ये आरोप लगा रहे है कि सरकार MSP खत्म कर रही है वही दूसरी तरफ ऑकड़े बता रहे है कि सरकार MSP पर किसानों से लगातार धान की फसल खरीद रही है। जो पिछले बार से 22 फीसदी ज्यादा है।  

 

MSP पर हुई रिकार्ड खरीद

मौजूदा खरीफ विपणन सत्र में अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 22.5 प्रतिशत बढ़कर 368.7 लाख टन तक पहुंच गई है। यह खरीद 69,612 करोड़ रुपये में की गई। शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया है कि अक्टूबर 2020 से शुरू हुये मौजूदा खरीफ विपणन सत्र 2020- 21 में सरकार लगातार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीफ फसलों की खरीदारी कर रही है।इसमें कहा गया है कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, तमिलनाडु, चंडीगढ़, जम्मू कश्मीर, केरल, गुजरात, आंध्र प्रदेश, ओडीशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में 2020-21 खरीफ सत्र की सरकारी खरीद लगातार सुनियोजित ढंग से चल रही है। वक्तव्य में कहा गया है कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्यों की अन्य एजेंसियों ने 10 दिसंबर 2020 तक 368.7 लाख टन धान की खरीद कर ली है जबकि इसी अवधि तक पिछले साल 300.97 लाख टन धान की खरीद की गई थी।

सबसे ज्यादा खरीद पंजाब में

इसमें कहा गया कि मौजूदा खरीफ विपणन सत्र के तहत एमएसपी पर चल रही खरीदारी से 39.92 लाख किसानों को फायदा हुआ है। यह खरीद कुल मिलाकर 69,611.81 करोड़ रुपये की हुई है। वक्तव्य के मुताबिक धान की कुल 368.70 लाख टन की खरीद में से अकेले पंजाब में 202.77 लाख टन की खरीद की गई है। इस प्रकार खरीफ की धान खरीद में करीब 55 प्रतिशत खरीदारी पंजाब से हुई है। इसके बाद भी जिस तरह से पंजाब के किसानों को गुमराह किया जा रहा है. उससे ये साप पता चलता है कि कही न कही किसान आंदोलन को लेकर कोई बड़ी सियासी खिचड़ी पक रही है। जिससे देश के माहौल को खराब किया जाये। ऐसे में किसान को उनकी हकीकत समझनी होगी।

यानी किसान को ये समझना चाहिये  कि न सरकार MSP खत्म करने जा रही है और नही मंडी ये सिर्प कुछ बिचौलियों की साजिश है जिसके तहत वो किसानो को गुमराह कर रहें है।