प्रधानमंत्री ऐतिहासिक बोडो समझौते पर हस्ताक्षर होने के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में भाग लेने 7 फरवरी, 2020 को कोकराझार जायेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 7 फरवरी, 2020 को बोडो समझौते पर हस्ताक्षर होने के उपलक्ष्‍य में आयोजित समारोह में भाग लेने के लिए कोकराझार, असम जाएंगे। इस कार्यक्रम में बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (बीटीएडी) जिलों के 4 लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीमद है। बता दे कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी कई प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री की यह पहली पूर्वोत्तर यात्रा होगी। ज्ञात हो कि इससे पहले सीएए विरोधी प्रदर्शनों के चलते ही प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री एबी शिंजो के बीच दिसंबर में गुवाहाटी में होने वाली शीर्ष बैठक रद कर दी गई थी। इसके अलावा हाल में संपन्न ‘खेलो इंडिया’ गेम्स के उद्घाटन के लिए भी प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वह उसमें शामिल नहीं हुए थे। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के रद होने के पीछे समयाभाव का कारण बताया गया था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जनवरी में हुए ऐतिहासिक बोडो समझौते के बारे में जनसमुदाय को संबोधित करेंगे। गौरतलब है कि समझौते पर 27 जनवरी, 2020 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे। नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट कर इस दिन को भारत के लिए बहुत महत्वसपूर्ण दिवस कहा था। ट्वीट में आगे कहा गया था कि यह समझौता बोडो लोगों के जीवन में बदलाव लाएगा और शांति, सदभावना और मिलजुलकर रहने के एक नई सुबह की शुरूआत होगी।

यह समझौता प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास विजन और पूर्वोत्त र क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्धता के अनुरूप है। इससे 5 दशक पुरानी बोडो समस्या् का समाधान हुआ है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने ट्वीट में कहा कि ‘बोडो समझौता कई कारणों से अलग है। जो लोग पहले हथियार के साथ प्रतिरोधी समूहों से जुड़े हुए थे वे अब मुख्य धारा में प्रवेश करेंगे और हमारे राष्ट्रा की प्रगति में योगदान देंगे। प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा कि बोडो समूहों के साथ समझौता बोडो लोगों की अनूठी संस्कृति को संरक्षित करेगा और लोकप्रिय बनाएगा।

बता दे कि हाल ही में भारत सरकार और मिजोरम एवं त्रिपुरा सरकारों के बीच ब्रू-रियांग समझौता हुआ था। इससे 35,000 ब्रू-रियांग शरणार्थियों को राहत मिली। त्रिपुरा में एनएलएफटी के 85 कैडरों ने आत्म समर्पण किया। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास और शांति के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इससे पहले गणतंत्र दिवस पर प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने हिंसा के मार्ग पर चलने वाले सभी लोगों को आत्मसमर्पण करने और मुख्य्धारा में शामिल होने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर मैं देश के किसी भी हिस्से के उन लोगों से अपील करता हूं कि वे मुख्यधारा में वापस आ जाएं जो हिंसा और हथियारों के माध्यम से समस्या का समाधान चाहते हैं।