पाक अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों ने कहा- पाकिस्तान सिर्फ उनकी देखभाल के लिए जिम्मेवार, अधिकारिक फैसलों के लिए नहीं

Pakistan is responsible for their care only

पाकिस्तान दिन पर दिन कमज़ोर होता दिख रहा है| एक तरफ आतंक से उसके रिश्ते होने की वजह से उसे पूरी दुनिया से बहिष्कार झेलना पड़ रहा है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान अपनी आर्थिक तंगी से परेशान| इसी क्रम में पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों ने उसके मुश्किलों को और बढ़ा दिया है|

जी हाँ सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों ने एक खुला पत्र लिखा है जिसमे उन्होंने पाकिस्तान की हैसियत की तुलना को देखभाल करने वाले के बराबर बताई है| उनका कहना है की पाकिस्तान सिर्फ उनकी देखभाल करने वाला देश है और उसे अपनी सीमाएं पार करने का कोई अधिकार नहीं है|

इन लोगों का मानना है की उनका गिलगित-बाल्टिस्तान का इलाका वास्तविक में जम्मू-कश्मीर राज्य का आंशिक टुकड़ा है जिसकी सिर्फ देखभाल करने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की है उससे ज्यादा उसका इस हिस्से पर कोइ हक नहीं है|

बता दे की 1947 में बटवारे के समय जम्मू-कश्मीर को तीन हिस्सों में बांटा गया था और फिर बाद में युद्ध ख़त्म होने के बाद तीसरे व उत्तरी इलाके गिलगित लदाख को दो हिस्से में बांट दिया गया| 28,000 वर्ग मील का यह इलाका श्रीनगर और मुजफ्फराबाद से अलग था और इसी इलाके से पाकिस्तान ने 1963 में करीब 2,000 वर्ग मील का इलाका चीन को दे दिया था|

पत्र द्वारा यहाँ के स्थानीय लोगों ने साफ़-साफ़ पाकिस्तान के नियमों का बहिष्कार कर दिया है| पत्र के मुताबिक यहाँ के लोगों का मानना है की समूचे जम्मू-कश्मीर में परिस्थितियां विवादित है इसका मतलब नियंत्रण रेखा के दोनों ओर के भागों में परिस्थितियां सामान्य है| गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों ने कहा की संयुक्त राष्ट्र के संकल्प और 28 अप्रैल, 1949 को हुए कराची समझौते के अनुसार यह इलाका जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है|

पाकिस्तान की भरपूर कोशिश रही की किसी भी प्रकार से इसे पाकिस्तान का हिस्सा बना दिया जाये| इसके लिए उसने गिलगित-बाल्टिस्तान के इलाके को पाकिस्तानी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा से जोड़कर वहां के जमीनी हालात बदलने की कोशिश की थी पर कामयाब नहीं हो पाया|

यह पत्र उन लोगो का मुह जरूर बंद कर देती जो भारत के कश्मीर वाले इलाके में रहते है और जिनका मानना है की उनका कश्मीर पाकिस्तान की जागीर है और भारत की सरकार उनपर ज़ुल्म कर रही है| इस पत्र के ज़रिये गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों ने सभी संगठनों और दलों से आग्रह किया है की है जम्मू-कश्मीर की वास्तविकता को कायम रखने के लिए संघर्षपूर्ण प्रयास करे|