साँच को आँच नहीं: नानावटी आयोग के फैसले से एक बार फिर से सिध्द हुआ

The Nanavati Commission verdict once again proved - साँच को आँच नहीं

युगों से देखा जा रहा है कि सत्य को हमेशा ही अग्निपरिक्षा से गुजरना पडता है, फिर वो सतयुग हो या फिर कलयुग हो। कई बार झूठ के बुलबुले इतने ज्यादा होते है, कि सत्य कुछ देर के लिये दिखाई नही देता, लेकिन जैसे ही ये बुलबुले फूट जाते है। सत्य फिर से और ज्यादा निखरकर सामने आ जाता है, कुछ इसी तरह आज हमारे पीएम नरेंद्र मोदी निखरकर सबके सामने आये है।

जानिये नानावटी आयोग के बारे में

27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में 59 कारसेवकों को जलाने की घटना के बाद समूचे गुजरात में दंगे भड़क उठे थे। इसकी जांच के लिए तीन मार्च 2002 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट सेवानिवृत्त जज न्यायमूर्ति जीटी नानावती की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया। न्यायमूर्ति केजी शाह आयोग के दूसरे सदस्य थे।शुरू में आयोग को साबरमती एक्सप्रेस में आगजनी से जुड़े तथ्य और घटनाओं की जांच का काम सौंपा गया। लेकिन जून 2002 में आयोग को गोधरा कांड के बाद भड़की हिंसा की भी जांच करने के लिए कहा गया। आयोग ने दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी, उनके कैबिनेट सहयोगियों व वरिष्ठ अफसरों की भूमिका की भी जांच की। 12 साल में 24 बार इस आयोग का समय बढ़ाया गया। आज इस आयोग ने अपनी फाइनल रिपोर्ट विधानसभा को सौप दी है। जिसमें पीएम मोदी जी को क्लीन चिट दी गई है।

‘सत्य परेशान होता है पराजित नही’

लेकिन आज पीएम मोदी जी को क्लीन चिट जरूर मिल गई हो लेकिन क्या आपको पता है कि दंगों के बाद मोदी जी के ऊपर किस तरह के आरोप लगाये गये? विपक्ष तो विपक्ष खुद कुछ मतलब रखने वाले अपनों ने भी मोदी जी के खिलाफ भीतरखाने सियासत करते हुए नजर आते थे। खुद पीएम कई बार उस वक्त को याद करके ये कहते हुए नजर आते है कि जांच एजेसियों ने उस वक्त उनके साथ क्या क्या सितम नही किये। सीएम होने के बावजूद घंटों दफ्तर में बैठाकर बिना कुछ पूछे उन्हे वापस कर दिया गया।

बिना किसी सूचने के दफ्तर पहुंचे के लिये कहा गया। साथ ही साथ देश की अहम पार्टियों के नेताओं ने ऐसे ऐसे तंज कसे जिसे अगर वो सोचते होगे तो जरूर कठोर से दिखने वाले मोदी जी का कोमल दिल भी अकेले में रोया होगा। लेकिन सच को परेशान किया जा सकता है लेकिन पराजित नही ये बात एक बार फिर से मोदी जी के तौर पर उदाहरण बनकर आई है और ये कहावत भी सच होती हुई दिख रही है साँच को आँच नहीं होती।