सुपरमून की ताकत से स्वेज नहर से हटा दैत्याकार जहाज ‘एवर गिवेन’

दुनियाभर के लिए संकट का सबब बना महाविशालकाय मालवाहक जहाज एवर गिवेन 6 दिन की कड़ी मेहनत के बाद अब पूरी तरह से निकल चुका है और अपने सफर पर रवाना हो गया है। एशिया और यूरोप के बीच माल लेकर जाने वाला, पनामा के ध्वज वाला एवर गिवेन नामक मालवाहक जहाज मंगलवार को स्‍वेज नहर में फंस गया था। इससे स्‍वेज नहर के दोनों तरफ समुद्र में जाम लग गया था और 350 से ज्‍यादा मालवाहक जहाज फंस गए थे। एवर गिवेन को निकालने के लिए रात-दिन चली इस कार्रवाई में दो चीजों का सबसे महत्‍वपूर्ण हाथ था। पहला सुपरमून और दूसरा दैत्‍याकार जहाज। चलिये जानते है कैसे निकला एवर गिवेन जहाज।

सुपरमून से समु्द्र में आया ज्‍वार, एवर गिवेन को मिला रास्‍ता

स्‍वेज नहर में फंसे जहाज को निकालने के लिए बचाव दल दिन-रात मेहनत कर रहा था लेकिन एवर गिवेन के जल्‍द निकलने की कोई उम्‍मीद नहीं दिखाई दे रही थी। करीब 400 मीटर लंबे और 59 मीटर चौड़े इस विशालकाय जहाज ने स्‍वेज नहर के दोनों तरफ के रास्‍तों को ब्‍लॉक कर दिया था। 193.3 किलोमीटर लंबी स्वेज नहर भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है। इसी रास्‍ते से दुनिया के करीब 30 फीसदी शिपिंग कंटेनर गुजरते हैं। पूरी दुनिया के 12 फीसदी सामानों की ढुलाई भी इसी नहर के जरिए होती है। इस महासंकट के बीच सुपरमून बचाव दल के लिए वरदान साबित हुआ और इसकी वजह से समुद्र में ज्‍वार आ गया। ज्‍वार की वजह से समुद्र में पानी बढ़ने से एवर‍ गिवेन जहाज को रास्‍ता मिल गया और वह फिर से पानी में तैरने लगा। एवर गिवेन के निकलने से दुनिया ने चैन की सांस ली है।

हर दिन दुनिया का हो रहा था अरबो का नुकासन

इस व्‍यस्‍ततम समुद्री मार्ग पर एवर गिवेन के फंसने से हर दिन 9.6 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा था। हर साल इस रास्‍ते से 19 हजार जहाज गुजरते हैं। यही नहीं करोड़ों बैरल कच्‍चा तेल और एलएनजी भी इसी रास्‍ते से ढोया जाता है। चीन में बने फर्निचर, कपड़े, सुपरमार्केट के सामान स्‍वेज नहर के रास्‍ते ही यूरोप तक जाते हैं। अगर यह नहर बंद हो जाय तो उन्‍हें 5000 किमी का चक्‍कर लगाकर अफ्रीका के रास्‍ते से यूरोप जाना होगा। इस जाम की वजह से खाड़ी देशों से तेल का निर्यात रुक गया था जिससे तेल और अन्‍य सामानों के दाम बढ़ने लगे थे। कंटेनर शिप एवर गिवेन चीन से माल लादने के बाद नीदरलैंड के पोर्ट रॉटरडैम के लिए जा रहा था। इस दौरान उसने हिंद महासागर से यूरोप में जाने के लिए स्वेज नहर का रास्ता अपनाया जहां वो फंस गया था। जिसके बाद समुद्र में पहली बार जाम की समस्या खड़ी हो गई थी।

यानी एक बार फिर सिद्द हो गया कि मानव की ताकत भी बड़ा प्रकृतिक की ताकत होती है जो बड़ी से बड़ी समस्या को हल कर सकती है।