देश के लोगों के साथ साथ प्रवासी भारतीयों का मोदी सरकार ने रखा ध्यान

देश में हो या विदेश में कोरोना काल के वक्त जिस तरह से पीएम मोदी ने सब भारतीयों का ध्यान रखा शायद ही कोई दूसरा रख पाता। एक तरफ लॉकडाउन लगने के बाद अपने घर से दूर रह रहे लोगों के लिये विशेष ट्रेन चलाकर पीएम मोदी ने लोगों की मदद की तो दूसरी तरफ विदेश में रह रहे भारतीयों का भी पूरा ख्याल रखा जिसके चलते वंदे भारत मिशन के चलते 98 देशों से 45.82 लाख भारतीयों को स्वदेश मुश्किल घड़ी में लाया गया।

कोरोना काल में 98 देशों से 45.82 लाख भारतीयों की हुई वतन वापसी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आज संसद के दोनों सदनों में कोरोना काल में विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद के लिए किवंदे भारत मिशन में 98 देशों से 45.82 लाख भारतीयों ने स्वदेश वापसी की। इसमें अधिकतर लोगों की संख्या खाड़ी देशों से हुई और सबसे ज्यादा संख्या में श्रमिक देश वापस लौटे। वंदे भारत मिशन के तहत स्वदेश वापसी करने वालों में 39% श्रमिक, 39% पेशेवर और 6% छात्र शामिल रहे। इसके साथ साथ मोदी सरकार ने  देश से 1.1 लाख से अधिक विदेशी पासपोर्ट धारकों को भी 120 देशों में वापस भेजा। जो ये बताता है कि पीएम मोदी ने किस तरह से देश के भीतर और बाहर ध्यान रखा देशवासियों का रखा। संसद में विदेस मंत्री ने बयान देते हुए बताया कि सबसे ज्यादा केरल के लोगो को वापस लाया गया है। इसके बाद दिल्ली महाराष्ट्र और तमिलनाडु के लोगों को लाया गया और अकेले एयर इंडिया समूह ने 9500 से अधिक उड़ानों का संचालन किया है।

 देश के लोगों को मुफ्त खाना और विशेष ट्रेन चलाकर की मदद

जहां एक तरफ मोदी सरकार ने इस विपदा भरे वक्त में विदेश में रह रहे लोगों का ध्यान रखा तो लॉकडाउन में कोई भी भूखा न रहे इसका ध्यान भी रखा मुफ्त खाने की व्यवस्था राशन द्वारा तो छठ पूजा तक जारी रखा। तो विशेष ट्रेन के जरिये लोगों को घर पहुंचाने में भी मोदी सरकार ने बिलकुल देर नहीं की इतना ही नही जिन लोगो को घर पहुंचाया गया उन्हे आत्मनिर्भर भारत पैकेज के जरिये रोजगार मोहइया करवाने की भी कोशिश की गई जिससे उन्हे आर्थिक नुकसान कम हो। साथ ही सीधे महिलाओं के खातो में पैसा डालकर कही न कही इस विपदा के वक्त लोगों का सहारा बनी मोदी सरकार की वजह से ही देस में कोरोना कब आया और कब इसकी रफ्तार धीरी हुई पता ही नहीं चला।

विश्व के नेता भी मोदी जी की तारीफ कोरोना से निपटने में करते हुए नही थकते है। और हो भी क्यों न मोदी जी ने काम ही कुछ ऐसा किया है और अब दुनिया को वैक्सीन मुफ्त में देकर कर रहे है। ऐसे में हम तो यही बोलेंगे कि इस बार का शांति नोबल पुरूस्कार मोदी जी को ही मिलना चाहिए।