दो दोस्तों की यारी, विस्तारवादी चीन की खत्म करेगी मनमानी

ड्रैगन की विस्तारवादी सोच को खत्म करने के लिए अब दो जिगरी दोस्तों ने कमान संभाली है। जिसके चलते अमेरिका का सबसे बड़ा विमानवाहक युद्धपोत निमित्‍ज अंडमान-निकोबार पहुंचा है। जिसके बाद हिंद महासागर में भारत और अमेरिका की नौसेना का दम देखकर चीन की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई है। विमानवाहक युद्धपोत निमित्ज 90 फाइटर जेट के साथ अंडमान पहुंचा है। जहां दोनो सेना मिलकर जंग का अभ्यास करेंगे।

क्यों अंडमान को चुना गया?

वैसे तो ड्रैगन को भारतीय फौज ने गलवान में अच्छा सबक सिखाया है लेकिन ऐसे वक्त में आप सोच रहे होंगे कि अमेरिका के साथ अंडमान में इस अभ्यास को क्यों चुना गया है। तो चलिये हम इस बात से पर्दा हटा देते है। अंडमान क्यों अहम है, इसे समझना भी आपके लिए जरूरी है। तीनों सेनाओं की पहली और इकलौती थियेटर कमान है। सेना, नेवी और एयरफोर्स एक ही कमांडर के अंदर है। दुनिया के बड़े ट्रेड रुट में शामिल हैं। साथ ही बंगाल की खाड़ी, मलक्का स्ट्रेट पर नज़र रखी जा सकती है। मलक्का स्ट्रेट से हर साल 70 हज़ार जहाज गुजरते हैं. चीन का तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। चीन पर अंडमान-निकोबार कमान से वार किया जा सकता है। तीसरा एयरबेस भी तैयार होने जा रहा है। भारत अगर मलक्का रूट को रोकेगा तो चीन को व्यापार के मोर्चे पर बड़ा झटका लग सकता है औऱ इसीलिये भारत ने ये कदम उठया है ।

हिंद महासागर में चीन को घेरने से क्या फायदा?

भारत की नौसेना ‘समुद्री पराक्रम’ के लिए तैयार है। दुश्मन के विस्तारवाद को कुचलने के लिए भारत समंदर में भी होशियार है। जहां साउथ चाइना सी में अमेरिका ने चीन को घेर रखा है तो वहीं हिंद महासागर में भारत लगातार अपनी ताकत बढ़ाने में लगा है वो इसलिये क्योंकि चीन इस रास्ते के जरिये कारोबार करता है और अगर भारत जंग जैसी स्थिति में चीन के इस मार्ग को रोक देता है तो समझिये की चीन एक पल में ही हार मान लेगा क्योंकि चीन का 80 फीसदी ऊर्जा इस मार्ग से पहुंचती है। वैसे चीन ने इसीलिये इस इलाके में अपना दबदबा बढ़ाने के लिये श्रीलंका को खुश करने की कोशिश की है। लेकिन वो चीन के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

काफी वक्त से बुरी नजर से देख रहा है चीन

वैसे हिंद महासागर को लेकर भी चीन की नीयत ठीक नही है वो कई इलाको में अपना कब्जा जमाने की सोच रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन की हरकतें तो पूरी दुनिया देख चुकी है, हिंद महासागर को लेकर भी उसकी नियत में खोट है। हिंद महासागर में भी पिछले काफी वक्त से चीन अपनी दखल बढ़ाने की कोशिश करता रहा है मई के महीने में पेट्रोलिंग मिशन का बहाना बनाकर चीन ने हिंद महासागर में जंगी जहाज़ तैनात किए थे। यहां तक कि मिसाइलों से लैस युद्धपोत भी हिंद महासागर में भेजे थे। हिंद महासागर पर कब्जे के लिए चीन मालदीव में कृत्रिम द्वीप विकसित कर रहा है। यहां तक कि अफ्रीका में चीन ने अपने नेवल बेस को आधुनिक बना दिया है, समंदर पर कब्जे के लिए पाकिस्तान के ग्वादर में भी नेवल बेस बना रहा है।

बहरहाल चीन कितनी भी तैयारी कर ले लेकिन अब उसकी विस्तारवादी सोच का खुलासा हो गया है और इसलिये समूची दुनिया एक स्वर में चीन को समझाने  के लिये साथ आ रही है और अगर चीन अब भी अपनी सोच नही बदलता है तो ये जान ले की अब उसका अंत करीब है।