सेना ने पेश की मानवीयता की मिसाल, प्रोटोकॉल तोड़कर पाकिस्तानी बच्चे का शव उसके माता पिता के हवाले किया

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कश्मीर के बांदीपुरा जिले के अचुरा गाँव के निवासियों ने बुधवार को किशनगंगा नदी (भारत और पाकिस्तान के बीच बहने वाली नदी) में एक बच्चे का शव तैरते देखा जिसके बाद उन्होंने भारतीय सेना को इसकी जानकारी दी| जानकारी मिलने के बाद सेना ने इस बच्चे के शव को नदी से बाहर निकाला। शिनाख्त करने पर पता चला कि बच्चा पाकिस्तान का रहने वाला है। जिसके बाद भारतीय सेना ने मानवता की मिसाल कायम करते हुए निर्धरित प्रोटोकॉल को तोड़कर उस 8 साल के बच्चे के शव को पाकिस्तान को सौंप दिया|

बताया जा रहा है कि बच्चे के माता-पिता ने भारतीय सेना के अधिकारीयों से बच्चे का शव सौंपने की अपील की थी। बच्चे का शव पाने के बाद उसके माता-पिता ने भारतीय सेना का आभार व्यक्त किया और उनका अभिवादन भी किया |

भारतीय सीमा में बहकर आया था बच्चे का शव

बताया जा रहा है पाक अधिकृत कश्मीर से लापता इस बच्चे का शव तैरते हुए भारतीय सीमा में आ गया था। बच्चे का शव मिलते ही भारतीय सेना ने हॉटलाइन के ज़रिये इसकी सुचना पाकिस्तान को दे दी| सूत्रों के मुताबिक बच्चा पाकिस्तान के गिलगित का मूल निवासी था| बच्चे की जानकारी मिलने के बाद माता-पिता ने सोशल मीडिया के तहत भारतीय सेना के अधिकारियों से बच्चे के शव को उन्हें सौंपने की अपील की जिसके बाद सेना ने बच्चे के शव को पाकिस्तान को सौंप दिया।

सेना ने बच्चे के शव को उसके माता-पिता को सौंप कर पूरी दुनिया के सामने मानवीयता का एक बड़ा उदाहरण पेश किया है| बहुत से ऐसे लोग है जिनका मानना है कि भारतीय सेना कश्मीर की जनता के साथ क्रूर व्यवहार करती है| इसी बात को अपना मूल मंत्र बना कर पाकिस्तान कश्मीर के युवाओ को सेना के खिलाफ भड़काने का काम करता है। इतना ही नहीं पाकिस्तानी सेना, अलगाववादी और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI भड़के युवाओ को आतंक में शामिल होने के लिए उत्तेजित करती है और उनके भविष्य को तहस-नहस कर देती है।

अभी कुछ दिनों पहले ही IndiaFirst ने अपने पाठकों को एक खबर से रूबरू कराया था जिसमें भारतीय सुरक्षाबलों ने आपसी मुठभेड़ में घायल एक आतंकी की जान बचाई थी और दुर्गम रास्तों से होते हुए, घायल आतंकी को अपने कंधे पर उठाकर सुरक्षित स्थान पर लेकर आई थी।

भारतीय सेना की मानवीयता भरी ऐसी कई घटनाओं को देखने के बाद उम्मीद है कि कश्मीर के युवाओ को इस बात का एहसास हो कि सेना उनकी सुरक्षा के लिए 24 घंटे तत्पर रहती है और उनके मन में सेना के प्रति घृणा के बदले आभार की भावना उत्पन्न हो।