आर्टिकल 370 पर सामने आई कांग्रेस की मतभेद वाली विचारधारा, कुछ कर रहे समर्थन वहीँ कुछ को है इस फैसले से आपत्ति

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

आर्टिकल 370 को जम्मू-कश्मीर से ख़त्म करने का अचानक से आया सरकार का फैसला सबको हैरान करने वाला था | पर धीरे धीरे जब लोगों को ये फैसला पूरी तरह समझ में आया तो देश भर से लोगों ने इस फैसले का तहे दिल से स्वागत किया और अनूठे अंदाज़ में अपनी प्रशंसा ज़ाहिर की | पर रोचक बात ये रही की इस फैसले से जितने मतभेद पाकिस्तान और भारत के सरकार में नहीं हुए उससे ज्यादा तो विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेताओं के बीच हो गए है |

अनुछेद 370 हटाने के मोदी सरकार के फैसले का डा. कर्ण सिंह ने किया स्वागत

जी हाँ कांग्रेस सरकार के इस फैसले का विरोध कर रही है या समर्थन अभी तक कुछ साफ़ नहीं हो पाया है |क्योंकि एक तरफ जहाँ कांग्रेस के नामचीन चेहरे इस फैसले के विरुद्ध खड़े है वहीँ दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर सरकार के इस फैसले का अभिनन्दन किया है | इसी क्रम में जम्मू-कश्मीर के पूर्व राजा हरि सिंह के बेटे कर्ण सिंह भी सरकार के फैसले का समर्थन करते नजर आए | बता दें कि कर्ण सिंह कश्मीर के आखिरी महाराजा हरि सिंह के बेटे हैं। पिता उन्हें टाइगर कहते थे। वह 20 जून 1949 को जम्मू-कश्मीर के राज्याधिकारी बने और बाद में 17 नवंबर 1952 से लेकर 30 मार्च 1965 तक सदरे रियासत रहे। डॉ. कर्ण सिंह 30 मार्च 1965 को जम्मू-कश्मीर के पहले राज्यपाल बने।

सरकार के फैसले में कई सकारात्मक पक्ष

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रह चुके कर्ण सिंह ने सरकार के आर्टिकल 370 ख़त्म करने के फैसले और राज्य को 2 केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के फैसले के प्रति समर्थन पेश किया है और साथ ही ये भी कहा है की पूर्ण रूप से इस फैसले की निंदा करना सही नहीं है | कर्ण सिंह कहते है की सरकार के इस फैसले में कई ऐसे बिंदु है जो सकारात्मक है और देश के हित में है जिनका विरोध उचित नहीं है |

कर्ण सिंह ने आगे कहा की- ‘सदर-ए-रियासत रहते हुए मैंने 1965 में कश्मीर राज्य को 2 केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का सुझाव दिया था | देर से ही सही पर किसी सरकार ने तो वोट बैंक की राजनीती न करते हुए कश्मीर की जनता के हित के लिए ये कदम उठाया है | मैं सरकार के इस फैसले की पूर्ण रूप से निंदा का विरोध करता हूँ |’

बता दे की कांग्रेस के कुछ और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है | इन सारें घटनाओ को देखकर इतना कहा जा सकता है की जिस पार्टी में उनके नेताओं की विचारधारा में इतना अंतर और मतभेद है वो भला देश की विचारधारा को कैसे एक करेगी |

 


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •