दिल्ली- मुंबई कॉरिडोर परियोजना से भी ड्रैगन की कंपनियों को दिखाया बाहर का रास्ता 

मोदी सरकार लगातार चीन पर आर्थिक  वार पर वार किये जा रही है जिससे चीन की कमर टूटती जा रही है। और उसके देश की हजारो कंपनियों को करोड़ो डॉलर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। 59 एप पर बैन लगाने के बाद भारत ने ड्रैगन को एक और झटका दिया है जिसके तहत अब चीन को सरकार ने दिल्ली मुंबई कॉरिडोर परियोजना से बाहर का रास्ता दिखाया है।

चीन को भारत की तरफ से एक और झटका

लद्दाख के गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच पैदा हुए तनाव के बाद केंद्र सरकार का चीन के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने का सिलसिला जारी है। इस क्रम में सरकार ने कृषि क्षेत्र में प्रयोग होने वाले पावर टिलर व उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने सरकार के महत्वाकांक्षी ग्रीन फील्ड दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर परियोजना में दो चाइनीज कंपनियों को ठेके देने से मना कर दिया है। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले दिनों साफ कहा था कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में चाइनीज कंपनियों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि किसी चाइनीज कंपनी को ठेका मिल गया है, तो उसे रद्द कर पुन: टेंडर जारी किए जाएंगे अथवा लोवेस्ट-दो कंपनी को ठेका दिया जाएगा।

चीन से बने कृषि औजार औऱ राखी पर भी रोक

इसके साथ साथ विदेश व्यापार महानिदेशालय ने भी एक  अधिसूचना जारी करते हुए कृषि क्षेत्र में प्रयोग होने वाले पावर टिलर व उसके उपकरणों के आयात पर रोक लगा दी है। गौरतलब है कि बड़े पैमाने पर चीन से पावर टिलर आयात किए जाते हैं। चीन से आयात होने वाले पावर टिलर भारत के मुकाबले 30 से 60 हजार रुपए तक सस्ते होते हैं। वर्तमान में पावर टिलर बाजार में चीन की हिस्सेदारी 35 फीसदी तक है। देश में सालाना पावर टिलर की औसतन बिक्री 35 से 40 हजार होती है। पावर टिलर का प्रयोग बड़ी जोत वाले किसान अधिक करते हैं। लेकिन सरकार के इस फैसले का स्वागत देश के किसानो ने भी किया है उनका कहना है कि ड्रैगन को सबक सिखाने के लिए वो सरकार के फैसले के साथ हैं इसी तरह राखी में चीन की बनाई राखियों का इस बार देश के दुकानदारो ने बहिष्कार किया है जिसका असर ये देखा जा रहा है कि चीन को करीब 4 हजार करोड़ रूपये का नुकसान उठाना होगा। यानी की मोदी सरकार चीन की हर उस नस पर वार कर रही है जिसके दबने से चीन के भीतर हालत खराब हो और खुद चीन की जनता चीनी सरकार के फैसले के खिलाफ खड़ी हो जाये। जैसा कि अब देखा जा रहा है। चीन की कुछ कंपनिया अब ये कहते हुए नजर आ रही है कि भारत से करोबार खत्म होने से उन्हे काफी ज्यादा आर्थिक चोट पहुंची है।

कुल मिलाकर मोदी सरकार ने चीन को हर स्तर पर घेर रखा है, फिर वो सीमा पर सेना द्वारा हो या फिर कूटनीति के चक्रव्यूह में विश्व में चीन को फंसाना हो या आर्थिक चोट देना हो हर तरफ से चीन पर भारत वार कर रहा है और वो वार कर रहा है जो देखने में छोटा लग रहा हो पर ड्रैगन को घाव गम्भीर कर रहा है।