सबसे घातक राइफल का होगा अब अमेठी में निर्माण, एके-203 असॉल्ट राइफल को बनाने की मिली मंजूरी

मोदी सरकार एक तरफ नये नये हथियारों से देश की सेना को मजबूत कर रही है तो दूसरी तरफ सेना को आत्मनिर्भर बनाने के लिये देश में ही हथियार का निर्माण भी करवा रही है। इसी क्रम में जहां झांसी में सेना के हथियारों को बनाने के लिये एक विशेष क़ॉरिडोर बनाया जा रहा है इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के अमेठी में पांच लाख से ज्यादा AK-203 असॉल्ट राइफलों की योजना को मंजूरी दे दी है।

5000 करोड़ रुपये की डील को मंजूरी

रक्षा मंत्रालय ने एके-203 असॉल्ट राइफल की करीब 5000 करोड़ रुपये की डील को मंजूरी दी है। मंत्रालय ने उस समय इस डील को फाइनल किया है, जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आने वाले हैं। वैसे इस डील पर कुछ साल पहले रूस और भारत के बीच सहमति बनी थी और अब इसको मंजूरी मिल चुकी है। दरअसल, खास बात ये है कि लंबी लागत के साथ ये राइफल भारत में ही निर्मित की जाएंगी। डीआरडीओ की ओर निर्मित भारत की इंसास राइफल  को एके-203 से ही रिप्लेस किया जा रहा है। कई सालों से इंसास में कई इश्यू आ रहे थे, लेकिन अब सरकार ने रूस के साथ ये डील की है।

AK-203 का बिना मैगजीन वजन 3.8 किलो

इस डील के जरिए भारतीय सेना को बंदूक के मामले में काफी सपोर्ट मिलने वाला है। एके-203, इंसास के मामले में काफी हल्की, छोटी और मॉर्डन राइफल है। इंसास का मैगजीन लगाए बिना वजन 4.15 किलो है जबकि एके-203 का बिना मैगजीन वजन 3.8 किलो है। इंसास की लेंथ 960 MM है, जबकि एके-203 की 705 MM है, जिसमें भी फोल्डिंग स्टॉक शामिल है। इसलिए यह हल्की, छोटी और खतरनाक राइफल है। एके 203 में 7.62 X 39mm की गोली का इस्तेमाल होता है जबकि इंसास में यह 5.56×45mm ही है यानी कैलिबर के मामले में भी यह गन काफी खतरनाक है।

सैनिकों की युद्ध क्षमता को मिलेगा बढ़ावा

एके-203 असॉल्ट राइफलें, 300 मीटर की प्रभावी रेंज के साथ, हल्की, मजबूत और प्रमाणित तकनीक के साथ आसानी से उपयोग में लाई जा सकने वाली आधुनिक असॉल्ट राइफल हैं। ये वर्तमान और परिकल्पित अभियान संबंधी चुनौतियों का पर्याप्त रूप से सामना करने के लिए सैनिकों की युद्ध क्षमता को बढ़ाएंगी। ये आतंकवाद और उग्रवाद विरोधी अभियानों में भारतीय सेना की परिचालन प्रभावशीलता को भी बढ़ाएंगी।

मोदी सरकार का संकल्प भी तो यही है कि सेना को मजबूत बनाने के साथ साथ आत्मनिर्भर भी बनाना है और इसके लिये वो लगातार काम भी कर रहे है जिसका ये एक उदाहरण है।