दो-राहे पर खड़ा देश, रास्ता अब देशवासियों को चुनना है

Supreme_Court

पुरानी कहावत है कि प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। पिछले तीन दिनों से नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हो रही हिंसा की तस्वीरें इस बात का प्रमाण है कि हमारे देश में कुछ लोग संविधान की रक्षा के नाम पर संविधान की ही धज्जियां उड़ा रहे हैं। उससे बड़ा मजाक ये है कि कुछ लोग इन्हे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी बता रहे है। लेकिन जो इन्हे शांतिदूत बता रहे थे उन लोगो को सुप्रीम कोर्ट ने जोर का झटका दिया है। जामिया हो या दूसरी कई जगह पुलिस कार्यवाही को गलत बताने वालों ने जब कोर्ट में इस कार्यवाही के खिलाफ केस दर्ज किया तो कोर्ट ने उन लोगों को सीधे सीधे फटकार लगाई है साथ ही कई सवाल भी पूछे है। पहली बार देखा गया कि कोर्ट किसी प्रदर्शन में पुलिस कार्यवाही को सही करार दे रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्यवाही को सही बताया

कोर्ट ने पुलिस कार्यवाही को सही बताया

CAA कानून को लेकर जिस तरह से पूरे भारत में उबाल देखा जा रहा है, सड़को पर प्रदर्शन हो रहे है उसको लेकर पुलिस कार्यवाही पर कोर्ट का भी कहना है कि अगर कोई पथराव करे, बस को तोड़े तो हम पुलिस से कैसे कह सकते है कि वो कार्यवाही न करें। इतना ही नही सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की तरफ से पेश हुए याचिका-कर्ताओं से ये भी पूछा कि अगर कोई कानून तोड़ता है तो पुलिस को क्या करना चाहिए ? पुलिस को हिंसा करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करने से कैसे रोका जा सकता है? वही CAA को वापस लेने वाली याजिका को भी खारिज करके ये दिखाया कि सत्य हमेशा सत्य होता है।

पीएम मोदी की अपील

जबकि पीएम मोदी एक बार नही बल्कि दो बार ये अपील भी कर चुके है कि जबतक उनकी सरकार इस देश में है, किसी भी अल्पसंख्यक को न ही परेशान किया जायेगा और जो अधिकार उन्हे मिले है उनसे कोई छीन भी नही सकता है। पीएम मोदी ने झारखंड से ऐलान भी किया है कि उनका सबसे बड़ा धर्म ग्रंथ सविधान है और उनका मंत्र सबका साथ, सबका विश्वास है उनकी सरकार इसके लिये ही काम करने में लगी हुई है।

लेकिन कुछ लोग अपनी सियासी रोटी चमकाने के लिये न कोर्ट की बात मान रहे है और न ही पीएम की अपील को सुन रहे है, वो तो स्थिति और कैसे बिगड़े इसके लिये कही राष्ट्रपति से मिल रहे है, या फिर मीडिया के सामने घड़ियाली आंसू बहाने में लगे हुए है। लेकिन दोस्तो देश का जो माहौल आज है, उसमें हमें काफी सजग रहना होगा क्योकि इस वक्त हमारा देश एक दो-राहे पर खड़ा है, एक तरफ वो लोग हैं, जो देश को हिंसा की आग में झोंक देना चाहते हैं और दूसरी तरफ वो लोग हैं जो देश को इस आग से बचाना चाहते हैं। फैसला आपको करना है कि आप किस तरफ खड़े होना चाहते हैं आज हमे ही तय करना होगा कि हम विकास की तरफ चले या फिर वही पुरानी सियासत जहां देश उतनी तेजी से तरक्की नही कर पाया जिसकी चाह हमें आजादी से थी। कबतक हम सियासी मसलों में उलझकर देश के विकास को जलते रहेगे। ऐसी सियासत बंद हो बस यही हम आह्वान करना चाहेंगे।