CAA और NRC को लेकर फैले भ्रम को दूर करना ही होगा

The confusion over CAA and NRC has to be cleared

देश के हर शहर हर गांव में आज यही चर्चा जोरों पर है कि CAA और NRC के बाद क्या होगा। इस सवाल को लेकर मेरे घर के पास रहने वाला एक मुस्लिम परिवार भी काफी परेशान था, और वो भी सियासत का शिकार होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में दिख रहा था, लेकिन तभी मेरी उससे मुलाकात हो गई। जब मैने उससे पूछा कि क्या हालचाल है, तो वो पहले तो शर्माया लेकिन बाद में अपने मन कि शंका से उसने हमे अवगत करवाया, जिसे सुनकर हमे लगा कि CAA और NRC को लेकर देश में कितना भ्रंम फैलाया गया है। फिलहाल मैने उससे यही कहा कि जो आप सोच रहे हो ऐसा कुछ भी नही है। आपको किस बात का डर सता रहा है तो उसने CAA , NRC से जुड़े कई सवाल मुझसे पूछे जिसका जवाब मैने सिलसिले वार से दिया।

सवाल:1 क्या भारतीय मुसलमानों के खिलाफ है CAA , NRC?

जवाब: देश में रह रहे किसी भी अल्पसंख्यक के खिलाफ नही है।

सवाल2: क्या NRC में लोगों को धार्मिक आधार पर किया जायेगा?

जवाब: नही NRC का धर्म से कोई मतलब नही है

सवाल:3 नागरिकता कैसे तय की जायेगी ? क्या यह सरकार के हाथ में होगा ?

जवाब: नागरिकता नियम, 2009 के अनुसार, नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत तय की जायेगी, जिसमें आपको वो प्रमाण पत्र दिखाने होगे जो आप अभी भी सरकारी कामकाज में दिखाते है।

सवाल:4 जब NRC देश में लागू होगा तो क्या मुझे अपने पूर्वजों का विवरण देना होगा?

जवाब:– NRC लागू होने पर आपको अपना विवरण देना होगा जो आप अपने जन्म प्रमाण पत्र से या दूसरे सरकारी प्रमाणों से दिये जा सकते है। आपको अपने पूर्वजों के प्रमाण को देने की जरूरत नही है

सवाल 5: जब NRC लागू होता है, तो क्या सभी को 1971 से पहले की सारे परिवार की जानकारी देना होगा?

जवाब: किसी को भी अपने परिवार का विवरण नही देना होगा,बस असम में ऐसा हुआ है वो भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते

सवाल-6 अगर कोई आदमी पढ़ा लिखा नही है और कोई प्रमाण नही है ऐसो के साथ क्या नियम है?

जवाब: – ऐसे लोगो की जानकारी इलाके में रहने वाले लोगों से ली जायेगी। पड़ोसी आपका गवाह सकता है या कुछ और तरीके जैसे सामुदायिक सत्यापन से नागरिकता बनी रहेगी

मेरे जवाब देने के बाद उसके चेहरे में चिंता की सिकन दूर हो गई और खुद उसने कहा कि वो इस कानून को लेकर काफी अनजान था, साथ ही उसने शुक्रिया लहजे में कहा कि अगर आप न होते तो शायद मैं भी अपने इलाके में हंगामा सरकार के खिलाफ खड़ कर चुका होता। आप ने जिस तरह से इस कानून को लेकर जो भ्रम दूर किया है उसका शुक्रगुजार मैं हमेशा रहूंगा।

मुझे एहसास हुआ कि आखिर किस तरह से सियासत करने वालों ने देश में एक बार फिर से 1947 की तरह ही आग लगाई है, जिसके चलते ही देश के कोने कोने में हंगामा देखा जा रहा है। ऐसे में हमारा ये कर्तव्य ही हम अपने आसपास के इलाकों में रहने वाले अपने अल्पसंख्यक भाइयों को ये समझाये कि इस कानून से आपको कोई नुकसान नही होगा और न ही नागरिकता को लेकर आप का अधिकार छीना जायेगा जिससे घर घर में फैली नफरत दूर हो और देश में महौल अमन का बने।