झोपड़ी में रहने वाले का भी बैंक खाता आज खुल चुका है जो देश के अर्थ तंत्र को नई ऊचांई पर ले जा रहा है

इस बात से तो कोई इंकार नहीं कर सकता है कि आज से 7 साल पीछे वक्त में जाये तो एक गरीब आदमी को बैक जाने में डर लगता था लेकिन मोदी सरकार ने एक तरफ जहां बैकिंग सिस्टम को सरल बनाया तो दूसरी तरफ देश के गरीबों में ये जोश भरा कि वो भी बैंक के जरिये अपना आर्थिक कामकाज कर सकते है। इसमें जनधन योजना एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ जिससे करोड़ो लोगों के बैंक में खाते खुल सके जिससे उनके अंदर एक आत्मबल तो बढ़ा ही आज वो बैकिंग सुविधा का फायदा भी उठा पा रहे है।

देश के आमजन तक पहुंची बैंकिग प्रणाली

देश में आज गरीब से गरीब व्यक्ति तक बैंकिग प्रणाली पहुंच चुकी है। ज्यादातर देश में लोगों के खुद के बैंक खाते है और वो उसका बेहिचक प्रयोग भी कर रहे है। खुद पीएम मोदी की माने तो 2014 में बैंकों की शक्ति को पहचान कर उनको आहृवान किया कि मुझे जन-धन अकाउंट का बड़ा मूवमेंट खड़ा करना है, मुझे गरीब की झोपड़ी तक जाकर बैंक खाते खुलवाने हैं।’ उन्होंने कहा, ‘जब देश के सामने एक लक्ष्य रखा कि हमें जन-धन खाते खोलना है, तो मैं आज गर्व के साथ सभी बैंकों का उल्लेख करना चाहूंगा, सभी बैंक कर्मचारियों का उल्लेख करना चाहूंगा, जिन्होंने इस सपने को साकार किया। खुद पीएम ने एक समारोह में बोला अगर जन धन खाते नही होते तो कोरोना महामारी के दौरान लोगों तक सुविधा नहीं पहुंच पाती। आज कोरोना के दौरान अगर लोगों का पेट भूख से खाली नही रहा है तो वो बैंक कर्मियों के कारण ही क्योंकि अगर वो घर घर ना जाते तो खाते नही खुलते और आज हम गरीब तक सुविधा नहीं पहुंचा पाते। पीएम का कहना है कि जनधन खातों के चलते क्राइम रेट कम हुआ है। उन्होंने बताया, ‘आज जब देश वित्तीय समावेश पर इतनी मेहनत कर रहा है तब नागरिकों की उत्पादक क्षमता को अनलॉक करना बहुत जरूरी है। जैसे अभी बैंकिंग सेक्टर की ही एक रिसर्च में सामने आयी है कि जिन राज्यों में जन-धन खाते जितने ज्यादा खुले हैं, वहां क्राइम रेट उतना ही कम हुआ है।

 

पिछली सरकार के कर्ज की भी वसूली की

पीएम मोदी ने इस दौरान पिछली सरकारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘हमने पिछली सरकार की तरफ से तैयार किए गए 5 लाख करोड़ रु के कर्ज यानी Bad Debts की भी वसूली की। इतना ही नहीं हमने हमारे बैंकिंग सिस्टम के काम करने के तरीके को बदल दिया.’ उन्होंने कहा, ‘हम आईबीसी जैसे सुधार लाए, अनेक कानूनों में सुधार किए, डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल को सशक्त किया। कोरोना काल में देश में एक समर्पित स्ट्रेस्ट एसेट मैनेजमेंट वर्टिकल का गठन भी किया गया।’ पीएम ने कहा कि कोविड के दौरान देश में समर्पित स्ट्रेस एसेट मैनेजमेंट वर्टिकल के गठन जैसे फैसलों के चलते आज बैंक की रिजॉल्युशन और रिकवरी बेहतर है। उन्होंने कहा है कि बैंक की स्थिति मजबूत हो रही है और उन्हें इसमें एक ताकत मिली है तो इसका उपयोग आज हमें गरीबों के जीवन को सुधारने में लगाना है। आज देश का गरीब बैंक से सीधे लोन ले रहा है तो डिजिटल तरीकों का भी प्रयोग कर रहा है। लेकिन इसे हमे और बढ़ाना है जिससे देश तेज गति से आगे बढ़ सके।

आज भारत के बैंकों की ताकत इतनी बढ़ चुकी है कि वो देश की इकॉनॉमी को नई ऊर्जा देने में, आगे बढ़ाने में, भारत को आत्मनिर्भर बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। बस इसके लिये बैंक को आमजन तक पहुंचना होगा और संकल्प करना होगा कि देश की आर्थिक तंत्र के विकास के लिये वो ऐसा करके रहेंगे।