सेना को मिली नई वर्दी तो 26 जनवरी का समारोह 23 जनवरी से मनाने का हुआ ऐलान

सेना के 74वें स्थापना दिवस पर भारतीय जवानों जहां नई कॉम्बेट यूनीफॉर्म के साथ नये युग में सेना ने प्रवेश किया। तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 24 जनवरी की जगह अब 23 जनवरी से गणतंत्र दिवस  समारोह को शुरू करने का फैसला किया है। यह फैसला नेताजी सुभाष चंद्र बोस  के जन्‍मदिन को गणतंत्र दिवस समारोह  में शामिल करने की वजह से ल‍िया गया।  

नई डिजिटल लड़ाकू वर्दी में हमारे जवान

कई सालों के इतंजार के बाद भारतीय सेना को नई वर्दी मिल गई है। सेना दिवस के मौके पर नई यूनीफॉर्म में पैराशूट रेजिमेंट के कमांडो ने परेड में मार्च नई आर्मी कॉम्बेट पैटर्न यूनिफॉर्म को 15 पैटर्न, आठ डिजाइन और चार फैब्रिक के विकल्पों के माध्यम से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की मदद से बनाया गया है। यह यूनीफॉर्म सैनिकों को अधिक आराम के साथ-साथ डिजाइन में एकरूपता प्रदान करेगी। इसे सेना की कार्य आवश्यकताओं और युद्ध पोशाक में एकरूपता की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इतना ही नही यूनीफॉर्म में जो कैमोफ्लाज यूज किया गया है इससे जवानों को छुपने में पहले से ज्यादा मदद मिलेगी। अमेरिका समेत कई देशों की आर्मी डिजिटल पैटर्न का इस्तेमाल करती है। मौजूदा यूनीफॉर्म में शर्ट पैंट के अंदर डाली जाती है और बाहर से बेल्ट लगाई जाती है। नई यूनीफॉर्म में बेल्ट अंदर होगी और शर्ट बाहर होगी। आर्मी अधिकारी के मुताबिक इससे काम करने में आसानी होगी। कपड़े में भी कुछ बदलाव किए गए हैं।

23 जनवरी से शुरू होगा गणतंत्र समारोह

गणतंत्र दिवस समारोह हमारे देश का एक प्रमुख कार्यक्रम है और इशको लेकर सरकार ने एक नई घोषणा की है। जिसके तहत अब 23 जनवरी से ये समारोह शुरू हो जायेगा जबकि पहले ये 24 जनवरी से शुरू होता था। इसके पीछे सरकार की मंशा सिर्फ इतना है कि वो देश के महान सपूत नेता जी यानी सुभाष चंद्र बोस की जयंती से इस की शुरुआत करके उन्हे सम्मान देना चाहती है जिसके वो हकदार भी है। वैसे भी पिछले 7 सालो में मोदी सरकार लगातार उन लोगों को सम्मान दे रही है जिनकी वीरता इतिहास में कही ना कही दफन हो गई थी। लेकिन अब उन्हे याद करके आने वाले भविष्य को भारत का सही इतिहास बताया जा रहा है।

मोदी सरकार का बड़ा फैसला, अब 23 जनवरी से शुरू होगा गणतंत्र द‍िवस समारोह, जानें इसकी वजह

इससे पहले भी सरकार ने कई देश के सपूतों को सम्मान देने का काम किया है जिसमें सरदार पटेल बिरसामुंडा जैसे सपूत शामिल है तो गुरू गोविंद सिंह के साहिबजादों के शहीदी दिवस को वीर बाल दिवस 26 दिसंबर को मनाने के ऐलान से ये बता दिया कि देश में अब सच्चे सपूतों का सम्मान होता है जिन्हे कुछ लोगों ने अपने फायदे के लिये इतिहास के पन्नो में दबा दिया था।

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